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बच्चों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर करती है गरीबी
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Wed, 27 May 2015 11:12 PM IST
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गरीबी देश के लिए अभिशाप है। इसका सबसे जीवंत प्रमाण है आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों का सरकारी स्कूलों से नाता तोड़ना। अब तक 45 हजार के करीब ऐसे विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुके हैं।
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इसका खुलासा पिछले दिनों चीफ सेक्रेटरी इकबाल खांडे ने किया था। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि इन विद्यार्थियों को वापस स्कूल में लाने के लिए विशेष तौर पर काम किया जाए, हालांकि अभी तक शिक्षा विभाग इस मामले में कुछ खास नहीं कर पाया है।
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राज्य में वर्तमान समय में 22,662 प्राइमरी स्कूल और 10,053 अपर प्राइमरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में दस लाख के करीब विद्यार्थियों की संख्या है, लेकिन 45 हजार के करीब विद्यार्थी अभी तक स्कूल की सुविधा से महरूम हैं।
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इसका कारण इन विद्यार्थियों का स्कूल छोड़ना है। ज्यादातर विद्यार्थियों ने आर्थिक परेशानियों से मजबूर होकर स्कूल को छोड़ा है। आठ से 14 वर्ष के इन विद्यार्थियों को वापस स्कूलों में लाने के लिए प्रत्येक वर्ष सर्व शिक्षा अभियान के तहत करोड़ों की राशि जारी की जाती है।
इस राशि से शिक्षा विभाग शहर व ग्रामीण इलाकों में जागरूकता रैलियां, संगोष्ठी, पेंटिंग व अन्य कई तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाता है। ग्रामीण इलाकों में विशेष तौर पर लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जाता है।
लेकिन अभी तक इसमें कामयाबी मिलती नजर नहीं आ रही है। स्कूल छोड़ चुके 45 हजार विद्यार्थियों को वापस स्कूलों में पहुंचाना राज्य के शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
अप्रैल से सरकारी स्कूलों में शिक्षा का नया सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग जागरूकता को लेकर कुछ करता नजर नहीं आ रहा है। सप्ताह के बाद स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां पड़ जाएंगी और फिर दो महीने तक शिक्षा विभाग की कोई गतिविधि नहीं होगी।