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फायरिंग और बाढ़ से हावी रहा पीटीएसडी

Wed, 31 Dec 2014 11:55 AM IST
Updated Wed, 31 Dec 2014 11:55 AM IST
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Post-traumatic stress disorder in jammu kashmir people in 2014

रियासत में बाढ़ के बाद सीमा पार से लगातार पाक गोलाबारी से पीडि़तों पर पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर (पीटीएसडी) हावी रहा है। पिछले कई महीनों से ऐसे हालात में बाढ़ और पाक फायरिंग के पीडि़तों को मानसिक तनाव से पीडि़त होना पड़ा है।

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सीजफायर के उल्लंघन की दहशत में लगातार जी रहे सीमांत ग्रामीणों में तनाव का स्तर बढ़ा है। मनोचिकित्सकों के अनुसार ऐसे हालात का सामना कर रहे लोगों में कई महीनों तक यह डर बैठा रहेगा।  इस साल सितंबर में बाढ़ की त्रासदी से हजारों लोग प्रभावित हुए।
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जम्मू संभाग में ही करीब दस हजार मकान भारी बारिश और बाढ़ की भेंट चढ़ गए जिससे हजारों लोगों को विस्थापन की मार झेलनी पड़ी। अभी भी दर्जनों परिवार आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, बाढ़ से ठीक पहले सीमा पार से बरसे पाक गोलों ने हजारों सीमांत ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी।
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यहां भी विस्थापन की मार पड़ी। दर्जनों लोगों को अपने आशियाने छोड़ने पड़े या वे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। ऐसे हालात में पीडि़तों पर पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर की सीधी मार पड़ी है। सीमा पार से लगातार सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है।

सीमा पर हजारों लोग मानसिक तनाव से प्रभावित

Post-traumatic stress disorder in jammu kashmir people in 2014

साइक्रेटरी अस्पताल में कार्यरत मनोचिकित्सक डा. मनु अरोड़ा का कहना है कि सीमा पार से लगातार हो रही फायरिंग से प्रभावित क्षेत्र के लोगों के शारीरिक और मानसिक स्तर पर बुरा प्रभाव पड़ा है। अस्पताल में ऐसे तनाव को लेकर बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे हैं।

सामान्य दिनचर्या में अचानक सब कुछ बदलने के कारण मानसिक तनाव का स्तर कई गुणा बढ़ जाता है। इसमें प्रभावित व्यक्ति की हैरानगी से आंख की पुतलियां सामान्य से ज्यादा खुल जाना, शरीर में तेजी से कमजोरी महसूस होना, दिल की धड़कन बढ़ना, दिल में अंजान डर बैठ जाना, छोटी सी बात पर भी चीख उठना आदि लक्षण रहते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में मानसिक तौर पर भारी तनाव आ जाता है। जिसमें पता नहीं चलता कि खुद कहां पर हैं और क्या हो गया। ऐसे हालात हृदय रोगियों के लिए जानलेवा भी साबित होते हैं।

पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस का असर छह माह तक रह सकता है। इसमें बच्चों में खासकर उनका शारीरिक, मानसिक और व्यक्तिगत विकास नहीं हो पाता है। ऐसे बच्चे अकेलापन सहन नहीं कर पाते, सहमे रहेंगे, अंधेरे से डर लगना, छोटी सी आवाज यानी कोई पटाखा चलने पर भी लगेगा कि कहीं हमला हो गया है, ही महसूस होता है। ऐसी घटनाओं के बाद प्रभावित व्यक्ति की पूरी जिंदगी ही बदल जाती है।

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