फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Poonch terror attack: Had there been roads education and electricity facilities in village

पुंछ: 'गांव में होती सड़क, शिक्षा, बिजली की सुविधाएं तो यह दिन न देखना पड़ता'- टोपापीर के लोगों का दर्द

Fri, 29 Dec 2023 03:30 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 29 Dec 2023 03:30 PM IST
सार

टोपापीर के ग्रामीणों का कहना है कि देश की आजादी के 70 साल बाद भी हमारे गांव के लिए कोई सड़क सुविधा नहीं है, गांव में एक प्राथमिक स्कूल है, बिजली के नाम पर चंद खंभे एवं तार और पानी की सप्लाई के लिए मात्र एक टैंक बना है। 

विज्ञापन
Poonch terror attack: Had there been roads education and electricity facilities in village
पुंछ का गांव टोपापीर - फोटो : मुनीष शर्मा

विस्तार

हमारे गांव में सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी एवं स्वास्थ्य सुविधाएं होतीं तो हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता। यह बात सुरनकोट तहसील के गांव टोपापीर के ग्रामीणों ने कही, जहां के तीन ग्रामीणों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, और कई ग्रामीण घायल अवस्था में अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इसके चलतेे आठ दिनों से कोई भी ग्रामीण गांव के बाहर भी नहीं जा पाया है।

विज्ञापन


टोपापीर के ग्रामीणों एजाज अहमद, नजीर अहमद, मोहम्मद सादिक, लाल हुसैन का कहना है कि देश की आजादी के 70 साल बाद भी हमारे गांव के लिए कोई सड़क सुविधा नहीं है, गांव में एक प्राथमिक स्कूल है, बिजली के नाम पर चंद खंभे एवं तार और पानी की सप्लाई के लिए मात्र एक टैंक बना है। 
विज्ञापन


गांव के बच्चों को पांचवीं कक्षा के बाद यहां से 12 किमी दूर बफलियाज जाना पड़ता है। इसके चलते गांव के चंद ही बच्चे 10वीं कक्षा से आगे पढ़ पाते हैं। देर सवेर गांव में कोई बीमार होता है तो सड़क न होने के कारण उसे कंधों पर उठाकर 12 किमी दूर पहाड़ से उतरकर बफलियाज से निजी वाहन से सुरनकोट पहुंचाना पड़ता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर हमारे गांव में भी सड़क होती एवं अन्य सुविधाएं होती तो शायद यहां ऐसे हालात नहीं होते। चारों तरफ जंगलों से घिरे होने के कारण आतंकवाद के दौर में इस तरफ से आतंकियों का खुलेआम आना-जाना होता था। अब भी क्या पता किस जंगल से आतंकी गुजरते हों। क्योंकि, आतंकवाद के दौर से ही आम लोगों ने जंगलों में लकड़ी काटने जाना बंद किया है। अब तो जंगलों में जानवरों की संख्या भी बहुत बड़ गई है जो गांव तक आ धमकते हैं।

गौरतलब है कि 30 वर्षों से अधिक समय से जारी आतंकवाद के दौर से ही अविकसित एवं सुविधाओं से वंचित क्षेत्र आतंकियों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। जिले में ऐसे ही क्षेत्र आतंकियों का गढ़ रहे हैं। 

आतंकवाद के शुरू में सड़क से दूर मढा, कुलाली, दोफल्ली, मरहोट, इलीयां, सोलियां, डोडी, हिलकाका, हाडीबुड्डा, मुगलमाडा के साथ ही हिलकाका जैसे क्षेत्रों में आतंकियों ने बरसों तक डेरा जमाए रखा और हिलकाका को आतंकियों से मुक्त कराने के लिए सेना को ऑपरेशन सर्पविनाश चलाना पड़ा था, जिसमें जमीन के साथ हेलिकॉप्टरों का उपयोग करते हुए सौ से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया था। 


आतंकयों के सफाए के साथ ही उन क्षेत्रों में सेना एवं प्रशासन की तरफ से विकास करवाने एवं सुविधाओं का विस्तार करने का काम किया गया। उधर, डीडीसी सदस्य सुरनकोट सुहेल मलिक का भी कहना है कि अगर टोपापीर जैसे क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं होती तो यहां पर जो समस्याएं आज सामने आ रही हैं, वह नहीं आती।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed