घाटी में अब सियासी लोग निशाने पर, दक्षिणी कश्मीर में हालात बिगाड़ने की साजिश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाटी में हिंसा के साथ ही अब सियासी लोगों तथा पुलिस वालों को भी निशाना बनाए जाने लगा है। खासकर दक्षिणी कश्मीर में हालात बिगाड़ने की साजिश रची गई है, ताकि 25 मई को अनंतनाग लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी श्रीनगर की ही तरह लोग वोट डालने के लिए लोग घरों से बाहर न निकलें।
आतंकियों की ओर से खुलेआम धमकी दी जा रही है कि मस्जिदों से यह एलान किया जाए कि लोग राजनीतिक दलों से नाता तोड़ें और पुलिस वाले नौकरी छोड़ें अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहें।
ज्ञात हो कि शनिवार को आतंकियों ने एक पीडीपी कार्यकर्ता की हत्या कर दी और एक अन्य को गोली मारकर घायल कर दिया। इसके साथ ही दो पुलिस वालों के घर पर भी हमले कर दहशत पैदा करने की कोशिश की।
अनंतनाग चुनाव से पहले आतंकियों की साजिश
सुरक्षा एजेंसियों के पास इस बात के इनपुट हैं कि अनंतनाग चुनाव से पहले ऐसा माहौल पैदा करने की आतंकी तंजीमों की ओर से साजिश रची गई है कि लोगों में चुनाव के प्रति खौफ पैदा हो जाए। यह क्षेत्र मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पीडीपी का गढ़ माना जाता है। इस वजह से यहां चुनाव बहिष्कार को और कारगर बनाने की साजिश की गई है।
अलगाववादियों तथा आतंकी संगठनों की ओर से चुनाव बहिष्कार के पोस्टर भी चिपकाए गए हैं। अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा में कई पूर्व सरपंचों को आतंकी धमका चुके हैं। इनमें ज्यादातर पीडीपी से जुड़े बताए जाते हैं।
पीडीपी के कद्दावर मंत्रियों के काफिले पर पत्थरबाजी के साथ ही उनके घरों पर हमले कर हथियार छिनने की घटनाएं भी इसी साजिश का हिस्सा बताई जाती हैं। दक्षिणी कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पीडीपी कार्यकर्ताओं को धमकाने में दो गिरफ्तार