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Jammu News: नेकां और भाजपा में वाकयुद्ध
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नेता प्रतिपक्ष ने बोले-विधानसभा में भड़काऊ नारे से नहीं मिलेगा राज्य का दर्जा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को राज्य का दर्जा मांगने की कोई जरूरत नहीं है। यह भाजपा का वादा है। उचित समय पर इसे बहाल किया जाएगा। विधानसभा के अंदर धार्मिक और भड़काऊ नारे लगाने से यह प्रक्रिया तेज नहीं होगी। विधानसभा कानून बनाने की जगह है, धार्मिक नारे लगाने की नहीं।
सुनील शर्मा ने शनिवार को श्रीनगर में कहा, सीएम को चुनावों के दाैरान प्रदेश की जनता से किए वादों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। नेकां के नेताओं ने विधानसभा में धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया है। विधानसभा जामिया मस्जिद नहीं। केंद्र प्रायोजित सभी योजनाएं बिना किसी बाधा के चलती रहेंगी। आतंकवाद और अलगाववाद पर कोई समझौता नहीं होगा। नेकां कहती रहती है कि उसके 10,000 कार्यकर्ता मारे गए, लेकिन, वे कब मारे गए? जब फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला गृह विभाग का नेतृत्व कर रहे थे, तब उनकी हत्या की गई थी। जब से कानून और व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आई है, तब से एक भी नेकां कार्यकर्ता की हत्या नहीं हुई है।
नहीं चलने दी सदन की कार्यवाही
सुनील शर्मा ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के मुद्दे पर चर्चा से भागने के लिए विधानसभा के अंदर नाटक किया। विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार था, जब सरकार ने खुद सदन को चलने नहीं दिया। सरकार उनकी थी, स्पीकर उनके थे, लेकिन उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए एक नाटक किया और सदन को तीन दिनों तक चलने नहीं दिया।
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सुरक्षाबलों का बलिदान किसकी विफलता
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने शनिवार को कहा कि ऐसा लगता है कि विधानसभा में विपक्ष के रूप में विफल होने पर नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा को केंद्र से डांट मिली है। दो दिनों में दो प्रेस कॉन्फ्रेंस और भाजपा नेता अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। हमारी सरकार के दौरान हमारे कार्यकर्ताओं की मौत के लिए नेकां को दोषी ठहरा रहे हैं। क्या भाजपा 2019 से लेकर आज तक हर एक सुरक्षाकर्मी के बलिदान के लिए जिम्मेदार है, जिसमें एक और जेसीओ की शहादत भी शामिल है। नेता प्रतिपक्ष बताएं कि सुरक्षाबलों का बलिदान किसकी विफलता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को राज्य का दर्जा मांगने की कोई जरूरत नहीं है। यह भाजपा का वादा है। उचित समय पर इसे बहाल किया जाएगा। विधानसभा के अंदर धार्मिक और भड़काऊ नारे लगाने से यह प्रक्रिया तेज नहीं होगी। विधानसभा कानून बनाने की जगह है, धार्मिक नारे लगाने की नहीं।
सुनील शर्मा ने शनिवार को श्रीनगर में कहा, सीएम को चुनावों के दाैरान प्रदेश की जनता से किए वादों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। नेकां के नेताओं ने विधानसभा में धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया है। विधानसभा जामिया मस्जिद नहीं। केंद्र प्रायोजित सभी योजनाएं बिना किसी बाधा के चलती रहेंगी। आतंकवाद और अलगाववाद पर कोई समझौता नहीं होगा। नेकां कहती रहती है कि उसके 10,000 कार्यकर्ता मारे गए, लेकिन, वे कब मारे गए? जब फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला गृह विभाग का नेतृत्व कर रहे थे, तब उनकी हत्या की गई थी। जब से कानून और व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आई है, तब से एक भी नेकां कार्यकर्ता की हत्या नहीं हुई है।
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नहीं चलने दी सदन की कार्यवाही
सुनील शर्मा ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के मुद्दे पर चर्चा से भागने के लिए विधानसभा के अंदर नाटक किया। विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार था, जब सरकार ने खुद सदन को चलने नहीं दिया। सरकार उनकी थी, स्पीकर उनके थे, लेकिन उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए एक नाटक किया और सदन को तीन दिनों तक चलने नहीं दिया।
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सुरक्षाबलों का बलिदान किसकी विफलता
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने शनिवार को कहा कि ऐसा लगता है कि विधानसभा में विपक्ष के रूप में विफल होने पर नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा को केंद्र से डांट मिली है। दो दिनों में दो प्रेस कॉन्फ्रेंस और भाजपा नेता अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। हमारी सरकार के दौरान हमारे कार्यकर्ताओं की मौत के लिए नेकां को दोषी ठहरा रहे हैं। क्या भाजपा 2019 से लेकर आज तक हर एक सुरक्षाकर्मी के बलिदान के लिए जिम्मेदार है, जिसमें एक और जेसीओ की शहादत भी शामिल है। नेता प्रतिपक्ष बताएं कि सुरक्षाबलों का बलिदान किसकी विफलता है।