{"_id":"67f199d688f1eff2ee09e27d","slug":"political-news-jammu-news-c-10-lko1027-582729-2025-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: अब आरक्षण पर घमासान, सरकार कोर्ट में फिर से सफाई देने की कर रही तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: अब आरक्षण पर घमासान, सरकार कोर्ट में फिर से सफाई देने की कर रही तैयारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब आरक्षण पर घमासान, सरकार कोर्ट
में नया हलफनामा देने की कर रही तैयारी
मंत्री सकीना इट्टू ने कहा - हलफनामा अस्पष्ट, जरूरत पड़ी तो कोर्ट के समक्ष नया जवाब दाखिल करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू/श्रीनगर। केंद्र से अधिकारों की लड़ाई के बीच उमर सरकार आरक्षण के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर अा गई है। ताजा सियासत जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में आरक्षण नीति को लेकर दाखिल किए गए समाज कल्याण विभाग के हलफनामे के बाद शुरू हुई है।
विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार पर मुद्दों से भटकाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
उधर, समाज कल्याण मंत्री सकीना इट्टू ने अनंतनाग में शनिवार को एक प्रेसवार्ता के दाैरान कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए दाखिल किया गया हलफनामा अस्पष्ट है। उन्होंने विभाग का बचाव करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार उच्च न्यायालय में पूरक जवाब यानी नया हलफनामा दाखिल करेगी। बताते चलें कि उच्च न्यायालय में पेश हलफनामे में सरकार ने आरक्षण नीति का बचाव करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सभी वर्गों को समान अवसर देना सरकार का कर्तव्य है।
मंत्री इट्टू ने कहा कि सरकार ने बीते दिसंबर माह में मौजूदा आरक्षण नियमों के खिलाफ उम्मीदवारों के कई वर्गों की शिकायतों पर विचार करने के लिए कैबिनेट उपसमिति का गठन किया है।
विज्ञापन
उपसमिति प्रतिनिधियों से मिल रही है और मुद्दे की जांच कर रही है।
उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि सभी को उसका उचित हिस्सा मिले और किसी के साथ अन्याय न हो। रविवार को शेर-ए कश्मीर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) श्रीनगर में बैठक होगी। इसमें उपसमिति प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी राय जानेगी। कैबिनेट मंत्री सकीना इट्टू ने आश्वासन दिया कि कैबिनेट उपसमिति छह महीने की समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी और फिर रिपोर्ट को लागू किया जाएगा।
-- -- -- -
यह है विवाद : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर में पहाड़ियों को 10% आरक्षण देकर उन्हें एसटी-2 में रखा है। गुज्जर-बकरवाल को पहले ही दस फीसदी आरक्षण मिलता है। इससे अनुसूचित जनजाति को 20% आरक्षण मिला है। साथ ही ओबीसी के आरक्षण को दोगुना करते हुए 8% किया गया। आरोप है कि इससे सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी घट रही है। इसको लेकर नेकां सांसद रुहुल्ला मेहदी लगातार आवाज उठा रहे है। सरकार ने मौजूद आरक्षण नीति में संसोधन के लिए एक उपसमिति भी बनाई है।
n हलफनामे में कहा गया है कि किसी भी एक वर्ग का स्थायी रूप से आरक्षण पर पूरा अधिकार नहीं है। यह सरकार का काम है कि वह यह देखे कि किस वर्ग को इसकी ज्यादा जरूरत है, जिससे समाज में संतुलन बना रहे।
n आरक्षण पाने के लिए किसी भी वर्ग का केवल, पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल होना जरूरी नहीं है। इसके लिए उनके वर्ग का सरकारी सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए। यह तय करना भी सरकार का ही काम है।
n इसी के साथ कहा गया है कि यदि आरक्षण का दायरा बढ़ाए जाने से किसी वर्ग के अधिकारों में कटौती नहीं हो रही, तो इसे अदालत में चुनौती देने की कोई वजह नहीं बनती है। इस बात को भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं ने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को नहीं, बल्कि आरक्षण में वृद्धि को ही चुनौती दी है।
विज्ञापन
में नया हलफनामा देने की कर रही तैयारी
मंत्री सकीना इट्टू ने कहा - हलफनामा अस्पष्ट, जरूरत पड़ी तो कोर्ट के समक्ष नया जवाब दाखिल करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू/श्रीनगर। केंद्र से अधिकारों की लड़ाई के बीच उमर सरकार आरक्षण के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर अा गई है। ताजा सियासत जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में आरक्षण नीति को लेकर दाखिल किए गए समाज कल्याण विभाग के हलफनामे के बाद शुरू हुई है।
विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार पर मुद्दों से भटकाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
उधर, समाज कल्याण मंत्री सकीना इट्टू ने अनंतनाग में शनिवार को एक प्रेसवार्ता के दाैरान कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए दाखिल किया गया हलफनामा अस्पष्ट है। उन्होंने विभाग का बचाव करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार उच्च न्यायालय में पूरक जवाब यानी नया हलफनामा दाखिल करेगी। बताते चलें कि उच्च न्यायालय में पेश हलफनामे में सरकार ने आरक्षण नीति का बचाव करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सभी वर्गों को समान अवसर देना सरकार का कर्तव्य है।
विज्ञापन
मंत्री इट्टू ने कहा कि सरकार ने बीते दिसंबर माह में मौजूदा आरक्षण नियमों के खिलाफ उम्मीदवारों के कई वर्गों की शिकायतों पर विचार करने के लिए कैबिनेट उपसमिति का गठन किया है।
विज्ञापन
उपसमिति प्रतिनिधियों से मिल रही है और मुद्दे की जांच कर रही है।
उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि सभी को उसका उचित हिस्सा मिले और किसी के साथ अन्याय न हो। रविवार को शेर-ए कश्मीर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) श्रीनगर में बैठक होगी। इसमें उपसमिति प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी राय जानेगी। कैबिनेट मंत्री सकीना इट्टू ने आश्वासन दिया कि कैबिनेट उपसमिति छह महीने की समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी और फिर रिपोर्ट को लागू किया जाएगा।
यह है विवाद : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर में पहाड़ियों को 10% आरक्षण देकर उन्हें एसटी-2 में रखा है। गुज्जर-बकरवाल को पहले ही दस फीसदी आरक्षण मिलता है। इससे अनुसूचित जनजाति को 20% आरक्षण मिला है। साथ ही ओबीसी के आरक्षण को दोगुना करते हुए 8% किया गया। आरोप है कि इससे सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी घट रही है। इसको लेकर नेकां सांसद रुहुल्ला मेहदी लगातार आवाज उठा रहे है। सरकार ने मौजूद आरक्षण नीति में संसोधन के लिए एक उपसमिति भी बनाई है।
n हलफनामे में कहा गया है कि किसी भी एक वर्ग का स्थायी रूप से आरक्षण पर पूरा अधिकार नहीं है। यह सरकार का काम है कि वह यह देखे कि किस वर्ग को इसकी ज्यादा जरूरत है, जिससे समाज में संतुलन बना रहे।
n आरक्षण पाने के लिए किसी भी वर्ग का केवल, पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल होना जरूरी नहीं है। इसके लिए उनके वर्ग का सरकारी सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए। यह तय करना भी सरकार का ही काम है।
n इसी के साथ कहा गया है कि यदि आरक्षण का दायरा बढ़ाए जाने से किसी वर्ग के अधिकारों में कटौती नहीं हो रही, तो इसे अदालत में चुनौती देने की कोई वजह नहीं बनती है। इस बात को भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं ने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को नहीं, बल्कि आरक्षण में वृद्धि को ही चुनौती दी है।