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Jammu News: वांगचुक की रिहाई के लिए लद्दाख दूसरे दिन भी रहा बंद
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- बाजारों में बुधवार को भी नहीं खुलीं दुकानें, वाहन भी नहीं चले
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख में पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक व अन्य लोगों को जल्द रिहा करने की मांग को लेकर बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी चक्का जाम रहा। बंद की कॉल लद्दाख के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से दी थी। बंद को कामयाब बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने जगह-जगह नाके लगाकर गाड़ियों की आवाजाही बंद करवा दी। इससे वाहनों में सफर करने वाले लोगों में भी काफी रोष देखा गया। बाजारों में दिन भर दुकानें नहीं खुलीं। जगह-जगह प्रदर्शन कर लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बताते चलें कि वांगचुक और 173 अन्य लोग यूटी को छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर दिल्ली चलो पदयात्रा के तहत राष्ट्रीय राजधानी की ओर जा रहे थे। उन्हें दिल्ली पुलिस ने सोमवार रात सिंघु सीमा पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के उल्लंघन के आरोप में हिरासत लिया गया था। बवाना, नरेला और कंझावला के पुलिस थानों में बंद बंदियों ने हिरासत के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
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लद्दाख को विशेष दर्जा दिलाने के लिए कर रहे थे मार्च
वांगचुक एक सितंबर को लेह से मार्च पर हैं। वे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं। इस समावेशन से लद्दाख के आदिवासी क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा मिलेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख में पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक व अन्य लोगों को जल्द रिहा करने की मांग को लेकर बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी चक्का जाम रहा। बंद की कॉल लद्दाख के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से दी थी। बंद को कामयाब बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने जगह-जगह नाके लगाकर गाड़ियों की आवाजाही बंद करवा दी। इससे वाहनों में सफर करने वाले लोगों में भी काफी रोष देखा गया। बाजारों में दिन भर दुकानें नहीं खुलीं। जगह-जगह प्रदर्शन कर लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बताते चलें कि वांगचुक और 173 अन्य लोग यूटी को छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर दिल्ली चलो पदयात्रा के तहत राष्ट्रीय राजधानी की ओर जा रहे थे। उन्हें दिल्ली पुलिस ने सोमवार रात सिंघु सीमा पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के उल्लंघन के आरोप में हिरासत लिया गया था। बवाना, नरेला और कंझावला के पुलिस थानों में बंद बंदियों ने हिरासत के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
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लद्दाख को विशेष दर्जा दिलाने के लिए कर रहे थे मार्च
वांगचुक एक सितंबर को लेह से मार्च पर हैं। वे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं। इस समावेशन से लद्दाख के आदिवासी क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा मिलेगी।
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