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अलगाववादियों पर सियासत गर्म, हिंदूवादी संगठन मुखर

Sat, 22 Aug 2015 12:45 PM IST
Updated Sat, 22 Aug 2015 12:45 PM IST
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political maelstrom on nsa and separatist meeting

पाकिस्तान के एनएसए से हुर्रियत नेताओं की प्रस्तावित मुलाकात और दोनों देशों के बीच एनएसए वार्ता पर मंडरा रहे संकट के बादल पर सियासत गरमा गई है। मुलाकात पर भाजपा तथा हिंदूवादी संगठन मुखर हो गए हैं तो घाटी में इस मुद्दे पर लामबंद लोगों ने सरकार पर अड़ंगेबाजी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर विरोध जताया।

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नेकां ने अलगाववादियों से पाकिस्तानी एनएसए से दूरी बनाए रखने की अपील की है। रियासत सरकार पहले ही कह चुकी है कि अलगाववादियों की मुलाकात से सरकार को किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। इससे जम्मू से लेकर श्रीनगर तक इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
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अलगाववादियों की पाक एनएसए से मुलाकात का विरोध करने वाले भाजपा तथा हिंदूवादी संगठनों का तर्क है कि इस मुलाकात से केवल घाटी में देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रियासत की अमन-शांति में खलल उत्पन्न होगा।
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जानबूझ कर कश्मीर मसले को उठाकर अंतरराष्ट्रीय फोरम पर इसे तूल देने की कोशिश की जाएगी। इस कोशिश के खिलाफ मुखर लोगों ने जम्मू और आरएस पुरा तथा आसपास के जिलों में विरोध प्रदर्शन कर अलगाववादियों तथा पाकिस्तान के झंडे फूंके।

रियासत में अमन-शांति बहाल रहे

political maelstrom on nsa and separatist meeting

डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल सिंह का कहना है कि इस मामले पर केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों की पैनी निगाह है। अनावश्यक रूप से विवाद को तूल दिया जा रहा है। हालांकि, राज्य सरकार के प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि राज्य सरकार को अलगाववादियों के कहीं भी जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

पहले भी वे जाते रहे हैं, लेकिन, दोनों देशों के बीच एनएसए स्तर की बातचीत होनी चाहिए ताकि रियासत में अमन-शांति बहाल रहे। पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां नेता फारूक अब्दुल्ला ने अलगाववादियों से पाक एनएसए से न मिलने की अपील की है।

उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के एनएसए स्तर की वार्ता जरूरी है ताकि बार्डर पर उत्पन्न तनाव का हल निकल सके। उन्होंने कहा कि यदि हुर्रियत की शर्तों पर भारत वार्ता रद करता है तो इससे बार्डर पर गोलाबारी जारी रहेगी और इस बात की आशंका है कि इसकी तीव्रता और बढ़ जाए।

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