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जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस माह उथल-पुथल की संभावना
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लोकल के लिए
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जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस माह उथल-पुथल की संभावना
-प्रदेश के कुछ कद्दावर नेताओं की दिल्ली में भाजपा नेतृत्व से चल रही बात, कई चक्र की बैठकें हो चुकीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस महीने उथल-पुथल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश में सक्रिय कुछ कद्दावर नेताओं की दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है। कई चक्र की बैठकें हो चुकी हैं। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो ये नेता अगले कुछ दिनों में भगवा खेमे का हिस्सा हो सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव और चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति में आने वाली चुनौतियों पर भी गहन मंथन कर रही है। अलग-अलग टीमें इसमें लगी हुई हैं। बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसमें चुनाव के दौरान आने वाली चुनौतियों तथा उसकी काट पर विचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर पार्टी को वोट तो मिलेगा लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। वोट बैंक को साधे रखने में मुश्किलें आएंगी क्योंकि पार्टी को महंगाई, बेरोजगारी तथा अन्य मुद्दों को झेलना होगा। खनन का विषय भी प्रमुखता के साथ सामने आएगा। कांग्रेस, नेकां, पीडीपी, पैंथर्स पार्टी समेत अन्य दलों के हमले को भी नाकाम करना है। हमलावर विपक्ष हावी न हो, इसके लिए कम से कम जम्मू संभाग के सभी जिलों में दमदार उपस्थिति तथा अधिकाधिक सीटें जीतने की रणनीति पर काम करना होगा। पार्टी उन सीटों को भी चिह्नित कर रही है जहां हिंदू-मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है। ऐसी सीटों को जीतने के लिए मुस्लिमों को अपने पाले में कर सकने वाले ऐसे नेता की तलाश की जा रही है जो शत-प्रतिशत न भी सही तो कुछ प्रतिशत मुस्लिमों के वोट भाजपा की झोली में डलवा सके। ताकि इन सीटों पर हिंदू मतदाताओं के मतों से सीट जीती जा सके।
अनुसूचित जनजाति को साधने वाले पर होगा दाव
मौजूदा परिसीमन में अनुसूचित जनजाति को पहली बार राजनीतिक आरक्षण मिल रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में दर्जनभर से अधिक सीटें एसटी के लिए आरक्षित होंगी। गुज्जर-बक्करवाल तथा गद्दी सिप्पी में मजबूत पकड़ जीत की कुंजी होगी। इन इलाकों में गैर भाजपाई दलों नेकां व पीडीपी की मजबूत पकड़ को देखते हुए भी पार्टी को ऐसे नेता की तलाश है जो इन दोनों बिरादरियों को साध सके।
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आरक्षित होने वाली संभावित सीटों का ब्योरा भी बना रही पार्टियां
परिसीमन आयोग दिल्ली में अपनी कार्रवाई तो कर ही रहा है, लेकिन भाजपा समेत अन्य दलों की ओर से भी अपने स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। परिसीमन के बाद आरक्षित होने वाली अनुसूचित जाति व जनजाति की सीटों का ब्योरा भी पार्टियां अपने स्तर पर तैयार कर रही हैं। संभावित इलाके का गुणा-गणित बैठाया जा रहा है कि कैसे उसे अपने पाले में किया जा सके।
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जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस माह उथल-पुथल की संभावना
-प्रदेश के कुछ कद्दावर नेताओं की दिल्ली में भाजपा नेतृत्व से चल रही बात, कई चक्र की बैठकें हो चुकीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस महीने उथल-पुथल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश में सक्रिय कुछ कद्दावर नेताओं की दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है। कई चक्र की बैठकें हो चुकी हैं। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो ये नेता अगले कुछ दिनों में भगवा खेमे का हिस्सा हो सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव और चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति में आने वाली चुनौतियों पर भी गहन मंथन कर रही है। अलग-अलग टीमें इसमें लगी हुई हैं। बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसमें चुनाव के दौरान आने वाली चुनौतियों तथा उसकी काट पर विचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर पार्टी को वोट तो मिलेगा लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। वोट बैंक को साधे रखने में मुश्किलें आएंगी क्योंकि पार्टी को महंगाई, बेरोजगारी तथा अन्य मुद्दों को झेलना होगा। खनन का विषय भी प्रमुखता के साथ सामने आएगा। कांग्रेस, नेकां, पीडीपी, पैंथर्स पार्टी समेत अन्य दलों के हमले को भी नाकाम करना है। हमलावर विपक्ष हावी न हो, इसके लिए कम से कम जम्मू संभाग के सभी जिलों में दमदार उपस्थिति तथा अधिकाधिक सीटें जीतने की रणनीति पर काम करना होगा। पार्टी उन सीटों को भी चिह्नित कर रही है जहां हिंदू-मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है। ऐसी सीटों को जीतने के लिए मुस्लिमों को अपने पाले में कर सकने वाले ऐसे नेता की तलाश की जा रही है जो शत-प्रतिशत न भी सही तो कुछ प्रतिशत मुस्लिमों के वोट भाजपा की झोली में डलवा सके। ताकि इन सीटों पर हिंदू मतदाताओं के मतों से सीट जीती जा सके।
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अनुसूचित जनजाति को साधने वाले पर होगा दाव
मौजूदा परिसीमन में अनुसूचित जनजाति को पहली बार राजनीतिक आरक्षण मिल रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में दर्जनभर से अधिक सीटें एसटी के लिए आरक्षित होंगी। गुज्जर-बक्करवाल तथा गद्दी सिप्पी में मजबूत पकड़ जीत की कुंजी होगी। इन इलाकों में गैर भाजपाई दलों नेकां व पीडीपी की मजबूत पकड़ को देखते हुए भी पार्टी को ऐसे नेता की तलाश है जो इन दोनों बिरादरियों को साध सके।
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आरक्षित होने वाली संभावित सीटों का ब्योरा भी बना रही पार्टियां
परिसीमन आयोग दिल्ली में अपनी कार्रवाई तो कर ही रहा है, लेकिन भाजपा समेत अन्य दलों की ओर से भी अपने स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। परिसीमन के बाद आरक्षित होने वाली अनुसूचित जाति व जनजाति की सीटों का ब्योरा भी पार्टियां अपने स्तर पर तैयार कर रही हैं। संभावित इलाके का गुणा-गणित बैठाया जा रहा है कि कैसे उसे अपने पाले में किया जा सके।