गुपकार गैंग एक्सपायर्ड इंजेक्शन, घटिया मानसिकता वाले दो खानदानों का राज नहीं चाहती है जनताः चुघ
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भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं जम्मू-कश्मीर के प्रभारी तरुण चुघ का कहना है कि गुपकार गैंग एक्सपायर्ड इंजेक्शन है। इसे अवाम ने फेयरवेल दे दिया है। यह ऐसा इंजेक्शन है जो न तो लगाया जा सकता है और न सहेजा। बस केवल इसे फेंका जा सकता है। कहा कि अनुच्छेद 370 जा चुका है, अब इस पर रोना बंद करें।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि गुपकार गैंग की असलियत कश्मीर की जनता जान गई है और घटिया मानसिकता वाले दो खानदानों का खानदानी राज नहीं चाहती है। वहां की जनता अब्दुल्ला एवं मुफ्ती परिवार के खानदानी राज से ऊब गई है।
कहा कि जो लोग सत्ता की खातिर नूराकुश्ती करते थे वे अब भाजपा के बढ़ते ग्राफ से बौखलाकर ही एक हुए हैं। हालत यह है कि नेकां व पीडीपी के प्रत्याशी अपने पोस्टरों पर फारूक, उमर या महबूबा के फोटो नहीं लगा रहे हैं। उन्हें पता चल गया है कि अब यह चेहरा बिकने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर के युवा अब आतंकवाद तथा पत्थरबाजी का कलंक माथे पर नहीं लेना चाहता है, बल्कि वहां का युवा अब रोजगार चाहता है। लोग चाहते हैं कि पर्यटन उद्योग फले फूले। कहा कि अब अनुच्छेद 370 पर यहां कोई बात नहीं होगी, बल्कि बात सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाली जमीन को वापस लाने की होगी। मुजफ्फराबाद में तिरंगा फहराने की होगी। यहां के नौजवान पत्थर और बंदूक नहीं उठाएंगे बल्कि कलम व लैपटॉप उठाएंगे। अपनी तकदीर खुद लिखेंगे। हैदराबाद, बंगलूरू की तरह जम्मू-कश्मीर को भी आईटी का हब बनाया जाएगा।
कुछ लोगों ने गैंग बनाकर जनता को लूटा
चुघ ने कहा कि 70 साल तक यहां की जनता को कुछ लोगों ने गैंग बनाकर लूटा है। लोगों की जेब व सम्मान पर डाके डाले गए हैं। 21वीं सदी में जब सभी जगह लिंग आधारित समानता है तो जम्हूरियत के नाम पर इस गैंग ने बेटियों के अधिकार को लूटा है। पिछड़ा वर्ग, बाल्मीकि समाज के अधिकारों का हनन किया। 370 हटने के बाद सभी को सपने की उड़ान भरने का हक मिला है।
अपनी पार्टी नहीं है भाजपा की बी टीम
राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि भाजपा अपने आप में ही पूरी टीम है। यह कहना गलत है कि अपनी पार्टी भाजपा की बी टीम है। यह ठीक है कि पहले जहां अन्य पार्टियां विष वमन करती थीं वहीं अब राष्ट्रवाद की बात करने वाली पार्टियां भी हैं। नई पार्टी या नौजवान राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं जो राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है।