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गुपकार गठबंधन में उठापटक शुरू, कई दिग्गज बदल सकते हैं पाला, निशाने पर नेशनल कांफ्रेंस
Tue, 12 Jan 2021 02:15 AM IST
Vikas Kumar
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 12 Jan 2021 02:15 AM IST
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गुपकार गठबंधन के नेता
- फोटो : amar ujala
जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के बाद भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने वाले गुपकार गठबंधन में उठापटक तेज हो गई है। कई दिग्गज पाला बदलने की तैयारी में हैं। गठबंधन के सहयोगियों के निशाने पर नेशनल कांफ्रेंस है। खुलकर नेकां पर भितरघात करने, गठबंधन उम्मीदवारों के खिलाफ प्रत्याशी उतारने तथा सीटों के बंटवारे में भेदभाव के आरोप लगाए जा रहे हैं। अब 280 में से 110 सीटें जीतने पर गठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
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सूत्रों ने बताया कि कई असंतुष्ट नेता पाला बदलने की तैयारी में हैं। कुछ जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे हैं। बताते हैं कि दो से तीन पूर्व विधायकों की अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठकें भी हो चुकी हैं। आने वाले दिनों में ये पाला बदल सकते हैं। अपनी पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुलाम हसन मीर ने बताया कि सियासत में कुछ भी संभव है। पार्टी के साथ कई और शीघ्र जुड़ने वाले हैं।
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गठबंधन के सहयोगियों में सबसे ज्यादा असंतोष सीट बंटवारे को लेकर है। उनका कहना है कि नेशनल कांफ्रेंस के ज्यादा उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। इसके बाद भी कई जगह पार्टी ने गठबंधन प्रत्याशियों के खिलाफ प्रॉक्सी उम्मीदवार उतारे। इस वजह से कई सीटों पर गठबंधन के अधिकृत प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा।
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पीपुल्स कांफ्रेंस के महासचिव एवं पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी का कहना है कि पार्टी के प्रत्याशियों का प्रदर्शन गठबंधन के अन्य सहयोगियों से बेहतर रहा है। कुछ और सीटें पार्टी की झोली में आ सकते थे, लेकिन गठबंधन के प्रॉक्सी उम्मीदवारों की वजह से सफलता नहीं मिली। पार्टी को घाटी में 140 सीटों में से 10 सीटें ही दी गईं।
उमर के राजनीति में बने रहने या न रहने के बयान ने बढ़ाई चिंताएं बढ़ीं
नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से एक चैनल के इंटरव्यू में दिए गए बयान कि वह सोच रहे हैं कि राजनीति में बने रहना है या नहीं, ने पार्टी काडर की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
काडर का कहना है कि गुपकार गठबंधन भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। साथ ही 370 की बहाली के लिए संघर्ष कर रहा है। फिलहाल यह जम्मू-कश्मीर में युद्ध जैसी स्थिति है और उनके जनरल ही मैदान से हटने की बात कह रहे हैं। ऐसे में तो आम कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा।