J&K: आर्मी चीफ के बयान ‘आजादी लेना एक ख्वाब, पर रियासत की सियासत गर्म
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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की ओर से दिए बयान जिसमें उन्होंने कश्मीरी युवाओं से कहा ‘आजादी लेना एक ख्वाब है, भारतीय सेना से लड़ना संभव नहीं’ को लेकर कश्मीर घाटी के सियासी गलियारों में राजनीति गरमा गई है।
जहां एक ओर भाजपा सेना अध्यक्ष के बयान को सही ठहरा रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि सेना अध्यक्ष के बयान से यह साफ हो गया है कि राज्य में सैन्य शासन चलता है। वहीं, इस मामले पर पीडीपी चुप्पी साधे बैठी है।
भाजपा के पूर्व उप मुख्यमंत्री और मौजूदा स्पीकर डा. निर्मल सिंह ने सेना अध्यक्ष के बयान पर कहा कि जो कुछ भी सेना अध्यक्ष ने कहा है वो एक संदेश है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, भारत के साथ-साथ पूरे विश्व भर में हिंसा की कोई जगह नहीं है।
उन्होंने अपील की है उन लोगों से जिन्हें समस्या है, वह सामने आएं और अपने मसलों को रखें ताकि हम मिल बैठकर उनका निवारण कर सकें। मसले पर नेकां के सीनियर नेता मोहम्मद अकबर लोन ने कहा कि हाल ही में हुई सर्वदलीय बैठक में सर्वसहमति में यह तय हुआ कि वह (महबूबा मुफ्ती) केंद्र के सामने एक तरफा सीजफायर का सुझाव रखेंगी।
लेकिन अभी उनकी ओर से आए बयान को 12 घंटे भी नहीं हुए कि सेना अध्यक्ष ने अपने दिए बयान से हमारे दिमाग से यह बात निकाल दी कि यहां मुख्यमंत्री शासन नहीं बल्कि सैन्य शासन चलता है। उन्होंने कहा कि सेना अध्यक्ष ने अपने बयान से मुख्यमंत्री के अधिकार को एक चुनौती दी है।
यह उनके लिए एक शर्म की बात है अगर वो अभी भी कुर्सी पर कायम रहती हैं। लोन ने कहा कि या तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर अपने दिए बयान को वापिस लें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने से लोगों का 50 फीसदी गुस्सा कम हो सकता है।
हालांकि आजादी को लेकर अपनी राय सामने रखते हुए लोन का कहना था कि वह आधिपत्त नहीं बल्कि स्वायत्तता बहाल करने की मांग करते है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यहां के युवाओं के हाथों में हथियार, पत्थर, आदि लेकर आजादी के लिए लड़ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सेना अध्यक्ष के बयान पर पीडीपी ने चुप्पी साधी हुई है। इसको लेकर जब पीडीपी के सीनियर नेता नईम अख्तर से प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने स्पष्ट लफ्जों में कह डाला ‘मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता’ लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हमारी एक सर्वदलीय बैठक हुई है।
जिसमें एक राजनीतिक फैसला लिया गया है जिसको लेकर हम दिल्ली जाकर बात करेंगे। लेकिन इस सबके बीच पीडीपी और भाजपा के बीच सीजफायर के सुझाव को लेकर मतभेद देखने को मिल रहे हैं।
जहां पीडीपी एक तरफा सीजफायर के प्रस्ताव पर दिल्ली जाकर बात करने का इशारा दे रही है, वहीं भाजपा के तकरीबन सभी सदस्य दो तरफा सीजफायर की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आतंकियों की ओर से गोली चलती है तो फिर उसका जवाब कैसे दिया जाएगा।