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Jammu News: पीओजेके विस्थापितों ने किया प्रदर्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पीओजेके विस्थापितों की मांगों को पूरा नहीं किया गया है। सिर्फ वोट बैंक बनाने की ही राजनीति हुई है। विस्थापित आज भी हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सांसद भी मांगों को पूरा करवाने में असफल रहे हैं। यह बात पीओजेके विस्थापितों के पंजीकृत फ्रंटलाइन संगठन एसओएस इंटरनेशनल के अध्यक्ष राजीव चुन्नी ने प्रदर्शन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र की डबल इंजन सरकार ने पीओजेके शरणार्थियों के मसले हल नहीं किए हैं। पिछले एक दशक में सरकारों की नीतियां भेदभावपूर्ण रही हैं। अब शरणार्थी मुश्किल में हैं। उन्होंने कहा कि यह अफसोसजनक है कि जिन्होंने हमसे वोट मांगे, उन्होंने केवल वोट बैंक की राजनीति की। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले पीओजेके के लाखों विस्थापितों को स्पष्टीकरण देने को कहा।
उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2014 में जम्मू-कश्मीर सरकार की तत्कालीन कैबिनेट द्वारा घोषित व्यापक पैकेज का लाभ भी नहीं मिला। प्रत्येक पीओजेके समुदाय के परिवार के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे और युवाओं के लिए देश के पेशेवर और तकनीकी कॉलेजों में आरक्षण का प्रावधान किया गया। इतना ही नहीं पीओजेके समुदाय के युवाओं के लिए 8500 नौकरियों के सृजन का प्रावधान था। मगर, इस पैकेज को जारी करने में कुछ नहीं हुआ।
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तत्कालीन सरकार द्वारा घोषित 25 लाख रुपये तो छोड़िए 1947 पीओजेके विस्थापितों के परिवारों के लिए 5.5 लाख रुपये का वित्तीय पैकेज भी नहीं दिया गया। पिछले दो वर्षों में पीओजेके विस्थापितों का एक भी मामला नहीं सुलझाया गया है। उन्होंने विस्थापित पीओजेके लोगों के लिए आठ सीटें आरक्षित करने की मांग थी मगर एक सीट आरक्षित की गई है। यह लाेगों के साथ अन्याय है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रहने वाले पीओजेके विस्थापितों को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मंदिरों और गुरुद्वारों सहित उनके धार्मिक स्थलों पर जाने की अनुमति देने की मांग की है।
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जम्मू। पीओजेके विस्थापितों की मांगों को पूरा नहीं किया गया है। सिर्फ वोट बैंक बनाने की ही राजनीति हुई है। विस्थापित आज भी हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सांसद भी मांगों को पूरा करवाने में असफल रहे हैं। यह बात पीओजेके विस्थापितों के पंजीकृत फ्रंटलाइन संगठन एसओएस इंटरनेशनल के अध्यक्ष राजीव चुन्नी ने प्रदर्शन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र की डबल इंजन सरकार ने पीओजेके शरणार्थियों के मसले हल नहीं किए हैं। पिछले एक दशक में सरकारों की नीतियां भेदभावपूर्ण रही हैं। अब शरणार्थी मुश्किल में हैं। उन्होंने कहा कि यह अफसोसजनक है कि जिन्होंने हमसे वोट मांगे, उन्होंने केवल वोट बैंक की राजनीति की। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले पीओजेके के लाखों विस्थापितों को स्पष्टीकरण देने को कहा।
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उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2014 में जम्मू-कश्मीर सरकार की तत्कालीन कैबिनेट द्वारा घोषित व्यापक पैकेज का लाभ भी नहीं मिला। प्रत्येक पीओजेके समुदाय के परिवार के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे और युवाओं के लिए देश के पेशेवर और तकनीकी कॉलेजों में आरक्षण का प्रावधान किया गया। इतना ही नहीं पीओजेके समुदाय के युवाओं के लिए 8500 नौकरियों के सृजन का प्रावधान था। मगर, इस पैकेज को जारी करने में कुछ नहीं हुआ।
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तत्कालीन सरकार द्वारा घोषित 25 लाख रुपये तो छोड़िए 1947 पीओजेके विस्थापितों के परिवारों के लिए 5.5 लाख रुपये का वित्तीय पैकेज भी नहीं दिया गया। पिछले दो वर्षों में पीओजेके विस्थापितों का एक भी मामला नहीं सुलझाया गया है। उन्होंने विस्थापित पीओजेके लोगों के लिए आठ सीटें आरक्षित करने की मांग थी मगर एक सीट आरक्षित की गई है। यह लाेगों के साथ अन्याय है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रहने वाले पीओजेके विस्थापितों को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मंदिरों और गुरुद्वारों सहित उनके धार्मिक स्थलों पर जाने की अनुमति देने की मांग की है।