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अरनिया तहसील को मिलेंगे पैंतीस और गांव
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अरनिया। परिसीमन आयोग की तरफ से सीमावर्ती सुचेतगढ़ की विधानसभा सीट का अस्तित्व समाप्त करने की खबरों के साथ ही अरनिया क्षेत्र में अटकलों सहित चर्चाओं का बाजार भी गर्म होना शुरू हो चुका है। हालांकि अभी तक इस पर आयोग की ओर से मुहर नहीं लगाई गई है। मगर फिर भी इन दिनों पूरे क्षेत्र में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सुचेतगढ़ सीट के करीब पैंतीस गांव अरनिया तहसील से जुड़ने जा रहे हैं। जो पहले से ही अरनिया थाना के अधीन हैं।
अगर इन अटकलों पर आयोग की अंतिम मुहर लग जाती है तो दस पंचायत हल्के व करीब 45 गांवों वाली अरनिया तहसील में गांवों का आंकड़ा अस्सी गांवों तक पहुंच जाएगा, जिससे आने वाले परिसीमन में अरनिया को विधान सभा हल्का बनाने में मदद मिल सकती है। मगर फिलहाल बिश्नाह सीट से जुड़ने वाले यह पैंतीस गांवों से मतदाताओं की संख्या बढ़ कर करीब 1.41 लाख तक पहुंच जाएगी।
स्थानीय निवासी सोनू पंडित का कहना है कि अगर अटकलें सच हो जाती हैं। तो सब अधिक लाभ अरनिया को मिलेगा। खासतौर से विकास में काफी तेजी आएगी, जिसमें अरनिया और चक्क शेरा के मध्य एक नाले पर पुल का निर्माण होने से दोनों ओर के लोगों को लाभ के साथ-साथ फासला भी कम हो जाएगा। वैसे भी 1995-96 में वजूद में आने वाली सुचेतगढ़ सीट के व्यासपुर परलाह, कल्याणा व चक्क मुला सहित कुछ गांव बिश्नाह सीट से ही अलग किए गए थे और अटकलों में यह गांव भी अरनिया तहसील में ही शामिल होने जा रहे हैं।
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चंगिया के डॉक्टर रघुवीर सिंह का कहना है कि ऐसी अटकलें व चर्चाएं सुनने को तो मिल रही हैं, लेकिन जब तक इसकी पुष्टि नहीं हो जाती तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन यह तय है कि दोनों ओर के लोगों खासतौर से किसानों को बहुत लाभ होगा।
ब्यासपुर परलाह के पंच दर्शन कुंडल का कहना है कि अटकलें तो बहुत सुनने को मिल रही हैं, अगर ऐसा हो जाता है तो दोनों ओर के किसानों को बहुत लाभ मिलेगा। क्योंकि दोनों ओर के किसानों की उपजाऊ भूमि एक दूसरे के क्षेत्र में हैं जिसे एक नाले ने रोक कर रखा है। वहीं तहसील आदि में कार्य कराने में समय के साथ-साथ कई अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी मिलेगी।
बिश्नाह के संदीप शर्मा का कहना है कि बिश्नाह विधान सभा हल्के में गांवों व लोगों में बढ़ोतरी होने से विकास कार्यों में कमी आएगी। क्योंकि हल्के के क्षेत्रफल में इजाफा होने से राज्य सरकार से जरूरत के मुताबिक विकास फंड लेना काफी मुश्किल हो जाएगा। तहसीलदार पुनिका का कहना है कि इस बारे में हमारे पास अभी तक कोई भी आदेश नहीं आया है।
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अगर इन अटकलों पर आयोग की अंतिम मुहर लग जाती है तो दस पंचायत हल्के व करीब 45 गांवों वाली अरनिया तहसील में गांवों का आंकड़ा अस्सी गांवों तक पहुंच जाएगा, जिससे आने वाले परिसीमन में अरनिया को विधान सभा हल्का बनाने में मदद मिल सकती है। मगर फिलहाल बिश्नाह सीट से जुड़ने वाले यह पैंतीस गांवों से मतदाताओं की संख्या बढ़ कर करीब 1.41 लाख तक पहुंच जाएगी।
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स्थानीय निवासी सोनू पंडित का कहना है कि अगर अटकलें सच हो जाती हैं। तो सब अधिक लाभ अरनिया को मिलेगा। खासतौर से विकास में काफी तेजी आएगी, जिसमें अरनिया और चक्क शेरा के मध्य एक नाले पर पुल का निर्माण होने से दोनों ओर के लोगों को लाभ के साथ-साथ फासला भी कम हो जाएगा। वैसे भी 1995-96 में वजूद में आने वाली सुचेतगढ़ सीट के व्यासपुर परलाह, कल्याणा व चक्क मुला सहित कुछ गांव बिश्नाह सीट से ही अलग किए गए थे और अटकलों में यह गांव भी अरनिया तहसील में ही शामिल होने जा रहे हैं।
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चंगिया के डॉक्टर रघुवीर सिंह का कहना है कि ऐसी अटकलें व चर्चाएं सुनने को तो मिल रही हैं, लेकिन जब तक इसकी पुष्टि नहीं हो जाती तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन यह तय है कि दोनों ओर के लोगों खासतौर से किसानों को बहुत लाभ होगा।
ब्यासपुर परलाह के पंच दर्शन कुंडल का कहना है कि अटकलें तो बहुत सुनने को मिल रही हैं, अगर ऐसा हो जाता है तो दोनों ओर के किसानों को बहुत लाभ मिलेगा। क्योंकि दोनों ओर के किसानों की उपजाऊ भूमि एक दूसरे के क्षेत्र में हैं जिसे एक नाले ने रोक कर रखा है। वहीं तहसील आदि में कार्य कराने में समय के साथ-साथ कई अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी मिलेगी।
बिश्नाह के संदीप शर्मा का कहना है कि बिश्नाह विधान सभा हल्के में गांवों व लोगों में बढ़ोतरी होने से विकास कार्यों में कमी आएगी। क्योंकि हल्के के क्षेत्रफल में इजाफा होने से राज्य सरकार से जरूरत के मुताबिक विकास फंड लेना काफी मुश्किल हो जाएगा। तहसीलदार पुनिका का कहना है कि इस बारे में हमारे पास अभी तक कोई भी आदेश नहीं आया है।