J&K: 'कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है'...कुमार विश्वास ने जम्मू में बिखेरा समा, तालियों से गूंजा सभागार
कवि डॉ. कुमार विश्वास ने जम्मू विश्वविद्यालय में पावरग्रिड राजभाषा कवि सम्मेलन में अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सम्मेलन में उन्होंने कश्मीर की सुंदरता और सुरक्षाबलों के बलिदानों पर कविताएं प्रस्तुत की।
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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है....कवि डाॅ. कुमार विश्वास ने अपने चिर-परिचित अंदाज में शुक्रवार को जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) में समा बांध दिया।
जेयू के जनरल जोरावर सिंह सभागार में उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते रहे। मौका था पावरग्रिड उत्तरी क्षेत्र द्वितीय ने राजभाषा कवि सम्मेलन का। सम्मेलन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन का मुख्य आकर्षण कवि डॉ कुमार विश्वास जिन्होंने अपनी विशिष्ट शैली और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रोताओं को अभिभूत कर दिया। उनके साथ रमेश मुस्कान, सुदीप भोला, डॉ. पद्मिनी शर्मा और कुशल कुलश्रेष्ठ ने भी मंच संभाला और अपनी रचनाओं से श्रोताओं की सराहना प्राप्त की। कवियों ने हास्य, व्यंग्य, गीतात्मक भाव और सामाजिक संदेश पर आधारित काव्य पाठ कर वातावरण को जीवंत कर दिया।
सम्मेलन में कवि डॉ कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं में कश्मीर की सुंदरता और देश के लिए सुरक्षा बलों के बलिदानों के वयक्त किया। डॉ. कुमार विश्वास ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कोई दिवाना कहता है, कोई पागल समझता है की पंक्तियां गुनगुनाई।
कश्मीर घाटी के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने वालों के खिलाफ खड़े हों कवि व लेखक
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कवियों और लेखकों को कश्मीर घाटी में युवाओं को बांटने और कट्टरपंथी बनाने की अलगाववादी कोशिशों का मुकाबला करते हुए एकता को मजबूत करना चाहिए। सिन्हा शुक्रवार को जम्मू यूनिवर्सिटी के जनरल जोरावर सिंह ऑडिटोरियम में पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में बोल रहे थे।
एलजी ने देश बनाने में साहित्य की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कवियों से अपनी बात कहकर मजबूत राष्ट्रीय पहचान और सामाजिक एकता बनाने की अपील की। कहा कि एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए कला और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइंस और संस्कार दोनों ही बहुत जरूरी हैं।