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विश्वास बहाली की पहल: कश्मीर के नेताओं का रुख भांप गुपकार गठबंधन को साधेंगे मोदी, विश्व समुदाय को भी देंगे संदेश
Thu, 24 Jun 2021 09:31 AM IST
Vikas Kumar
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 09:31 AM IST
सार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटने के बाद खुद को छला गया मान रहे आम कश्मीरियों में विश्वास बहाली की कोशिश होगी।
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जम्मू पर सर्वदलीय बैठक आज
- फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
दिल्ली में आज होने वाली जम्मू-कश्मीर के नेताओं की सर्वदलीय बैठक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई निशाने साध सकते हैं। बैठक से 370 और 35ए की बहाली पर उठ रही चर्चाओं को विराम देने की कोशिश होगी। हाल में दिग्विजय सिंह के सरकार में आने पर 370 पर विचार करने के बयान के बाद उठे विवाद को शांत कर कांग्रेस को भी साधने की रणनीति है। इसके साथ ही बैठक में कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों नेकां व पीडीपी समेत अन्य दलों का रुख भांपने के साथ उन्हें साधने की भी कोशिश होगी।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटने के बाद खुद को छला गया मान रहे आम कश्मीरियों में विश्वास बहाली की कोशिश होगी। मुख्यधारा की पार्टियों के नेताओं का दुख-दर्द सुन यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि सब अपने हैं। किसी से भेदभाव नहीं है और न ही केंद्र सरकार किसी के अधिकार छीनने के हक में है। इस बातचीत का उद्देश्य प्रदेश में राजनीतिक प्रक्रिया को तेज करने के साथ ही विश्व समुदाय को भी संदेश देना है कि मोदी सरकार कश्मीरियों के हित में है। 370 के प्रावधान हटाने के बाद भी केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित में काम कर रही है। पिछले दिनों दौरे पर आए विदेशी राजनयिकों ने 370 के प्रावधान हटने के बाद के हालात पर तो संतोष जताया था, लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया बहाल करने तथा विधानसभा चुनाव जल्द कराने को कहा था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 370 के प्रावधान हटने के करीब दो साल बाद पहली बार केंद्र की ओर से कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं को आमंत्रित किया जाना शुभ संकेत है। इससे अलग-थलग महसूस कर रहे नेकां, पीडीपी समेत गुपकार गठबंधन में शामिल दलों को यह अहसास दिलाने की कोशिश है कि केंद्र उनको भी तवज्जो दे रहा है।
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गुपकार गठजोड़ ने अलगाववादी एजेंडा आगे बढ़ाया तो गतिरोध
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के प्रो. रसाल सिंह का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनेताओं के साथ होने वाली बैठक शांति और लोकतंत्र की बहाली की दिशा में निर्णायक कदम है। अगर इस बैठक में शामिल होने वाले गुपकार गठबंधन का रवैया सकारात्मक रहा तो जल्दी ही परिसीमन प्रक्रिया को पूरा करके केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे। पूर्ण राज्य का दर्जा भी बहाल होगा। लेकिन अगर गुपकार गठजोड़ ने पुराना राग अलापते हुए अपना अलगाववादी एजेंडा आगे बढ़ाया तो बातचीत में गतिरोध पैदा हो सकता है।
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मोदी सरकार और गुपकार गठबंधन दोनों के लिए बैठक महत्वपूर्ण
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरिओम का मानना है कि सर्वदलीय बैठक मोदी सरकार और गुपकार गठबंधन दोनों के लिए अहम है। जिस प्रकार से गुपकार गठबंधन ने 370 के प्रावधान व 35 ए की बहाली, राज्य का विशेष दर्जा बहाल करने, पहले की तरह राज्य की बहाली, पाकिस्तान से बातचीत और राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग की है उससे मोदी सरकार सहमत होती नहीं दिख रही है। एजेंडा तो केंद्र सरकार को तय करना चाहिए था, लेकिन तय कर दिया गुपकार गठबंधन ने। यदि मोदी सरकार ने गठबंधन की एक भी मांग पूरी की तो वह भाजपा के लिए किरकिरी होगी, क्योंकि अगले साल उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में कोई जोखिम उठाने की संभावना कम दिखती है। यदि गुपकार की मांग पूरी नहीं हुई तो वे कश्मीर में अवाम को जवाब नहीं दे पाएंगे।