J&K: मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों को दफनाने के लिए कब्रगाह में कम पड़ने लगी जगह
जम्मू-कश्मीर की पुलिस और सुरक्षाबलों के सहयोग से ऑपरेशन आल आउट में इतने आतंकी मारे गए हैं कि उन्हें दफनाने के लिए कब्रगाह में जगह कम पड़ने लगी है। इस वर्ष मारे गए आतंकियों में सौ से अधिक विदेशी आतंकी शामिल रहे हैं। इन सभी विदेशी आतंकियों को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के गंटामुला शीरि में दफनाया गया है।
वर्ष 2015 के अक्टूबर में मारे गए लश्कर कमांडर अबू कासिम जो कि उधमपुर हमले का मास्टरमाइंड भी था, के जनाजे में हजारों लोग शामिल हुए थे। इसने सुरक्षा एजेंसियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद मुठभेड़ में मारे गए किसी भी विदेशी आतंकी का शव स्थानीय लोगों को नहीं दिया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें खुद गंटामुला शीरि में स्थानीय औकाफ के सदस्यों की मदद से दफनाने का निर्णय लिया।
दक्षिणी कश्मीर में ऑपरेशन आल आउट के चलते आतंकियों की संख्या में कमी देखने को मिली है। इस वर्ष करीब 70 नए आतंकी विभिन्न संगठनों में शामिल हुए हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इन आतंकियों में ट्रेनिंग की कमी के चलते लड़ने की उतनी क्षमता नहीं है।
ऑपरेशन आल आउट की खास बात यह रही कि इस ऑपरेशन के चलते सुरक्षा एजेंसियां आतंकवादियों पर दोहरा वार करने में कामयाब रहीं। सुरक्षा बलों ने उन आतंकियों को भी मार गिराया जो मारे गए कमांडरों की जगह लेने के लिए घाटी में घुसपैठ किए थे, जिनमें अबू तलहा (मसूद अजहर का भतीजा) और उसामा झंगवी (जकी-उर-रहमान लखवी का भतीजा) जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
पाक में बैठे आकाओं ने पहली बार कबूला
हाल ही में कश्मीर रेंज के आईजीपी मुनीर अहमद खान ने बताया था कि आतंकी आकाओं द्वारा अपने रिश्तेदारों को घाटी भेजने के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं। एक तो आतंकी संगठनों के पास नेतृत्व की कमी है और दूसरा वह यह दिखाकर कि उनके अपने भी इस मुहिम में शामिल हैं। ताकि अधिक से अधिक युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर सकें।
ऑपरेशन आल आउट के दौरान पहली बार मारे गए आतंकी को पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं ने कबूला है। मारे गए अबू तलहा (मसूद अजहर का भतीजा) को लेकर हाल ही में एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के एक बड़े आतंकी संगठन जैश ने पहली बार अपने आतंकी को कबूला है। उन्होंने कहा कि सही जरिये से हम पाकिस्तान को शव लेने को कहेंगे और अगर वह लेना चाहेंगे वह ले सकते हैं।