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जम्मू: मदद के लिए घनघना रहे फोन, इलाज के लिए डॉक्टर नहीं; जम्मू-कश्मीर के 11 जिलों में मनोचिकित्सक नदारद

Sat, 10 Oct 2026 11:48 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sat, 10 Oct 2026 11:48 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में टेली-मानस सेवा के जरिए दिसंबर 2025 तक मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों की 1.32 लाख से अधिक कॉल पर मदद की गई, लेकिन 11 जिलों में एक भी मनोचिकित्सक तैनात नहीं है।

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Phones ringing for help, but no doctors available for treatment.
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

मन में कोई परेशानी हो, लगातार बेचैनी बनी रहे या जिंदगी बोझ लगने लगे, तो कई बार इंसान समझ नहीं पाता कि अपनी बात किससे कहे और मदद कहां से मांगे। ऐसे समय में किसी का आपकी बात सुनना और सही सलाह देना भी बड़ी राहत बन सकता है। जम्मू-कश्मीर में मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए टेली-मानस के जरिये फोन पर मदद लेने की सुविधा है।

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वर्ष 2022 में शुरू हुई दिसंबर 2025 तक इस सेवा पर 1.32 लाख से अधिक कॉल संभाली जा चुकी थीं। लेकिन जब किसी को विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज की जरूरत पड़ती है, तो मुश्किलें सामने आती हैं। इसकी वजह है प्रदेश के 11 जिलों में एक भी मनोचिकित्सक तैनात नहीं है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर ये आंकड़े बताते हैं कि मानसिक परेशानी में मदद मांगने की सुविधा के साथ-साथ इलाज तक पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश के 11 जिलों में कोई मनोचिकित्सक तैनात नहीं है। इनमें जम्मू, सांबा, कठुआ, राजोरी, पुंछ, रामबन, किश्तवाड़, रियासी, शोपियां, बांदीपोरा और कुपवाड़ा शामिल हैं। हालांकि राष्ट्रीय और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम सभी जिलों में चलाए जा रहे हैं।

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टेली-मानस पर फोन कर ले सकते हैं मदद
टेली-मानस मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों को फोन पर मदद और सलाह देने की सुविधा है। इसके टोल-फ्री नंबर 14416 पर चौबीसों घंटे संपर्क किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार कॉल करने वालों को विशेषज्ञ से परामर्श या आगे इलाज के लिए संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था है।

कैग की रिपोर्ट में भी सामने आई लचर व्यवस्था
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर सरकारी व्यवस्था पर सवाल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भी उठे हैं। 30 मार्च 2026 को विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार नौ जिला अस्पतालों में मनोरोग की ओपीडी उपलब्ध नहीं थी। इनमें जम्मू, सांबा, किश्तवाड़, पुंछ, रामबन, बांदीपोरा, बडगाम, कुलगाम और शोपियां के जिला अस्पताल थे।

अस्पताल में बढ़ रही ओपीडी, रोज आ रहे 400 मरीज
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राजिंदर कुमार ने बताया कि जम्मू के मनोरोग अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 200 मरीज आते थे। संख्या लगभग 400 तक पहुंच गई है। मरीजों की बढ़ती संख्या से विशेषज्ञों व दूसरे कर्मचारियों की कमी से सेवाएं चलाना चुनौती बन रहा है।

आठ महीने से अटकी है मनोचिकित्सकों की भर्ती
जिला स्तर पर विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने फरवरी 2026 में मनोचिकित्सकों के 15 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इनमें जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी, ऊधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजोरी और पुंछ जिलों के लिए एक-एक पद शामिल।

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