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Jammu News: गन लाइसेंस मामले में दर्ज अतिरिक्त एफआईआर को रद्द करने वाली याचिकाएं खारिज

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Petitions seeking quashing of additional FIRs lodged in gun licence case dismissed
मामलों की जांच पहले से गठित एसआईटी से ही कराने के निर्देश
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। फर्जी गन लाइसेंस मामले में जांच से संबंधित दर्ज अतिरिक्त एफआईआर रद्द करने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हैं। इन याचिकाओं पर बुधवार न्यायाधीश रजनीश ओसवाल ने सुनवाई की। ये याचिकाएं राजोरी जिले से संबंधित हैं। इनकी जांच एसआईटी से कराने का आदेश भी दिया गया। हालांकि यह आदेश सरकार को सभी एफआईआर को एसीबी व सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों को सौंपने से नहीं रोकेगा।
केस के मुताबिक 7 फरवरी 2011 को जम्मू के जानीपुर पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई। इसमें दो लोग 12 बोर की बंदूकें ले जाते हुए पकड़े गए। इन हथियारों के लाइसेंस पुंछ के मेंढर एसडीएम द्वारा जारी किए गए थे। इन पर कुपवाड़ा, कठुआ और बुद्धल के पते थे। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी की जांच में पता चला कि राजोरी के एडीसी कार्यालय व मेंढर के एसडीएम कार्यालय से ये लाइसेंस फर्जी तरीके से तैयार किए गए।
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एसआईटी ने 216 बंदूक लाइसेंसों से संबंधित एक दस्तावेज राजोरी पुलिस स्टेशन व 179 बंदूक लाइसेंसों से संबंधित एक अन्य दस्तावेज मेंढर पुलिस स्टेशन को भेजा गया। इसमें अलग से एफआईआर दर्ज की गई। इसी के आधार पर राजोरी के ही कंडी में 2012 और 2015 में थन्नामंडी में दे अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं।
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पूरे मामले में कुछ सरकारी अधिकारियों सहित अभियुक्तों द्वारा 4 एफआईआर रद्द करने की मांग की गई। न्यायाधीश ने कहा कि इन याचिकाओं में कोई दम नहीं है। वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोनिका कोहली की दलीलों से सहमति जताई जिन्होंने याचिका का कड़ा विरोध किया था।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि थन्नामंडी और कंडी पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर की जांच सरकार द्वारा पहले से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जानी आवश्यक है।

लिहाजा एडीजी जम्मू दोनों एफआईआर की जांच उसी एसआईटी को सौंपे जिसका गठन जानीपुर में दर्ज मामले की जांच के बाद हुआ था। एडीजी को विशेष जांच दल की जांच निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि यह जांच यथाशीघ्र पूरी हो और अंतिम रिपोर्ट बिना किसी कानूनी दखल के पेश हो।
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