{"_id":"5dd448628ebc3e54ea68100b","slug":"people-of-kashmir-said-more-drastic-the-steps-should-be-taken-against-the-kashmiri-politician","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कश्मीरी जनता बोली-नेताओं के खिलाफ जितना कठोर कदम उठाएं उतना बेहतर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कश्मीरी जनता बोली-नेताओं के खिलाफ जितना कठोर कदम उठाएं उतना बेहतर
Wed, 20 Nov 2019 05:08 AM IST
Pranjal Dixit
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 20 Nov 2019 05:08 AM IST
विज्ञापन
हाल-ए-कश्मीर
- फोटो : बासित जरगर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर को 5 अगस्त को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने की घोषणा से पहले ही नजरबंद किए गए राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हो रहे व्यवहार से घाटी के लोग नज़र आ रहे हैं खुश। उनका कहना है कि चाहे जितने भी कठोर कदम सरकार द्वारा उनके खिलाफ उठाए जाऐं वो बहुत कम हैं। आज जो उन पर बीत रही है वो उनके द्वारा ही तैयार नीतियों का नतीजा है। यह सब बातें सियासी नेताओं के साथ पुलिस कार्रवाइयों के बाद जनता के मुंह से सामने आ रही हैं।
श्रीनगर में एक स्थानीय नागरिक अब्बास वानी ने बताया कि सरकार ने जो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं को जो नजरबंद रखा है वो एक सोची समझी रणनीति के तहत है। सरकार उनपर शिकंजा कसे हुए है जिनके ऊपर दाग लगे हुए हैं। ये नेता सिर्फ अपने फायदे में लगे रहे घाटी के लोगों की आवाज को आगे नहीं ले गए। कश्मीर में चाहे बेरोजगारी हो या फिर विकास सब इनके कारण प्रभावित हुआ है। इसलिए इनके खिलाफ जितने कठोर कदम भी उठाए जाएं वो कम हैं।
वहीं एक अन्य नागरिक समीर अहमद ने बताया कि इन नेताओं ने जैसा बोया है आज उनके साथ वैसा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को जनता से कोई लेन देन नहीं है उन्हे केवल अपनी कुर्सी से प्यार है। प्रदेश में किसी की भी हकूमत रही हो उन्होने लोगों के साथ कोई वफा नहीं की है। उमर की हकूमत में वर्ष 2010 में भी कश्मीर में स्थानीय लोगों की जानें गई और महबूबा ने अपनी हकूमत के दौरान भी लोगों के साथ कोई वफा नहीं की। उन्होंने पीडीपी को घाटी के हालातों के लिए ज़्यादा जिम्मेदार ठहराया।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीनगर में एक स्थानीय नागरिक अब्बास वानी ने बताया कि सरकार ने जो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं को जो नजरबंद रखा है वो एक सोची समझी रणनीति के तहत है। सरकार उनपर शिकंजा कसे हुए है जिनके ऊपर दाग लगे हुए हैं। ये नेता सिर्फ अपने फायदे में लगे रहे घाटी के लोगों की आवाज को आगे नहीं ले गए। कश्मीर में चाहे बेरोजगारी हो या फिर विकास सब इनके कारण प्रभावित हुआ है। इसलिए इनके खिलाफ जितने कठोर कदम भी उठाए जाएं वो कम हैं।
विज्ञापन
वहीं एक अन्य नागरिक समीर अहमद ने बताया कि इन नेताओं ने जैसा बोया है आज उनके साथ वैसा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को जनता से कोई लेन देन नहीं है उन्हे केवल अपनी कुर्सी से प्यार है। प्रदेश में किसी की भी हकूमत रही हो उन्होने लोगों के साथ कोई वफा नहीं की है। उमर की हकूमत में वर्ष 2010 में भी कश्मीर में स्थानीय लोगों की जानें गई और महबूबा ने अपनी हकूमत के दौरान भी लोगों के साथ कोई वफा नहीं की। उन्होंने पीडीपी को घाटी के हालातों के लिए ज़्यादा जिम्मेदार ठहराया।
विज्ञापन
नेताओं की तलाशी पर हुआ था विवाद
गौरतलब है कि रविवार को जम्मू कश्मीर के करीब 34 विधायकों को सर्दियां शुरू होने पर श्रीनगर के एसकेआईसीसी से एमएलए हॉस्टल शिफ्ट किया गया। और इस दौरान सुरक्षा कर्मियों द्वारा की गई उनकी तलाशी के दौरान विवाद भी खड़ा हुआ था जिसको लेकर पुलिस के स्पष्ट कर दिया था कि जो कुछ भी हुआ वो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत हुआ है। इन नेताओं में नेका के अली मोहम्मद सागरए मुबारख गुलए पीडीपी के नईम अख्तरए पीपुल्स कॉंफ्रेंस के सज्जाद गनी लोनए पूर्व आईएएस शाह फैसल के अलावा अन्य कई नेता शामिल है।
गौरतलब है कि रविवार को जम्मू कश्मीर के करीब 34 विधायकों को सर्दियां शुरू होने पर श्रीनगर के एसकेआईसीसी से एमएलए हॉस्टल शिफ्ट किया गया। और इस दौरान सुरक्षा कर्मियों द्वारा की गई उनकी तलाशी के दौरान विवाद भी खड़ा हुआ था जिसको लेकर पुलिस के स्पष्ट कर दिया था कि जो कुछ भी हुआ वो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत हुआ है। इन नेताओं में नेका के अली मोहम्मद सागरए मुबारख गुलए पीडीपी के नईम अख्तरए पीपुल्स कॉंफ्रेंस के सज्जाद गनी लोनए पूर्व आईएएस शाह फैसल के अलावा अन्य कई नेता शामिल है।