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बजट: कश्मीर घाटी में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग निराश
अमृतपाल सिंह बाली/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Mon, 29 Feb 2016 10:13 PM IST
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कश्मीर घाटी में पर्यटन से जुड़े लोगों में पेश बजट से निराशा हाथ लगी है। उनका कहना है कि उन्हें केंद्रीय बजट से काफी उम्मीदें थी। लेकिन, घोषणा के बाद पर्यटन इंडस्ट्री को कुछ हाथ नहीं लगा।
घाटी का एकमात्र ऐसा क्षेत्र ‘पर्यटन क्षेत्र’ जिस पर घाटी की अर्थव्यवस्था अधिकतर निर्भर करती है, उसे झटका लगा है। इससे पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग निराश हैं।
एडवेंचर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (एटीओके) के अध्यक्ष रौफ ट्रम्बू ने कहा कि कश्मीर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए वित्त मंत्री से उम्मीदें बांध रखी थीं। लेकिन कुछ नहीं मिला।
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उन्होंने कहा कि इससे पहले रेल बजट में भी उन्हें निराशा हाथ लगी। काफी समय से मांग थी कि गर्मियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएं। कोई घोषणा रेल बजट में भी नहीं हुई।
ट्रम्बू के अनुसार जम्मू में बाकी इंडस्ट्री भी है, लेकिन घाटी अधिकतर पर्यटन पर निर्भर है। उन्होंने एडवेंचर टूरिज्म को लेकर कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम आदि की तरह जम्मू-कश्मीर भी हिमालयन स्टेट है, जो अधिकतर यूरोपियन पर्यटकों को आकर्षित करती है।
इसके लिए विशेष इक्विपमेंट की आवश्यकता होती है, जिसे बाहर से मंगवाना पड़ता है। ट्रम्बू के अनुसार हमने मांग की थी कि इक्विपमेंट मंगवाने में जो टैक्स लगता है, छूट मिलनी चाहिए, लेकिन इस पर बजट में गौर नहीं किया गया।
पिलग्रिम एंड लेजर टूर ऑपरेटर फोरम (पिल्टोफ) के अध्यक्ष नासिर शाह के अनुसार हमें बजट से काफी उम्मीदें थी। जहां तक पर्यटन क्षेत्र का सवाल है हमें उम्मीद थी कि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रचार अभियान, ढांचागत विकास, रखरखाव जैसी चीजों के लिए अधिक धनराशि आवंटित की जानी चाहिए थी।
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घाटी का एकमात्र ऐसा क्षेत्र ‘पर्यटन क्षेत्र’ जिस पर घाटी की अर्थव्यवस्था अधिकतर निर्भर करती है, उसे झटका लगा है। इससे पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग निराश हैं।
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एडवेंचर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (एटीओके) के अध्यक्ष रौफ ट्रम्बू ने कहा कि कश्मीर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए वित्त मंत्री से उम्मीदें बांध रखी थीं। लेकिन कुछ नहीं मिला।
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उन्होंने कहा कि इससे पहले रेल बजट में भी उन्हें निराशा हाथ लगी। काफी समय से मांग थी कि गर्मियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएं। कोई घोषणा रेल बजट में भी नहीं हुई।
ट्रम्बू के अनुसार जम्मू में बाकी इंडस्ट्री भी है, लेकिन घाटी अधिकतर पर्यटन पर निर्भर है। उन्होंने एडवेंचर टूरिज्म को लेकर कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम आदि की तरह जम्मू-कश्मीर भी हिमालयन स्टेट है, जो अधिकतर यूरोपियन पर्यटकों को आकर्षित करती है।
इसके लिए विशेष इक्विपमेंट की आवश्यकता होती है, जिसे बाहर से मंगवाना पड़ता है। ट्रम्बू के अनुसार हमने मांग की थी कि इक्विपमेंट मंगवाने में जो टैक्स लगता है, छूट मिलनी चाहिए, लेकिन इस पर बजट में गौर नहीं किया गया।
पिलग्रिम एंड लेजर टूर ऑपरेटर फोरम (पिल्टोफ) के अध्यक्ष नासिर शाह के अनुसार हमें बजट से काफी उम्मीदें थी। जहां तक पर्यटन क्षेत्र का सवाल है हमें उम्मीद थी कि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रचार अभियान, ढांचागत विकास, रखरखाव जैसी चीजों के लिए अधिक धनराशि आवंटित की जानी चाहिए थी।