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रियासत में 200 से बढ़कर 1000 रुपये हुई पेंशन राशि
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 30 Aug 2016 10:44 PM IST
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पेंशन योजना
- फोटो : अमर उजाला
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राज्य सरकार ने वृद्धावस्था, विधवा तथा शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों की मासिक पेंशन को 200 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया है। बढ़ी हुई राशि का भुगतान गत अप्रैल महीने के प्रभाव से किया जाएगा। इससे रियासत के 5.70 लाख लाभार्थियों को लाभ पहुंचेगा। यह घोषणा समाज कल्याण मंत्री सज्जाद गनी लोन ने मंगलवार को की।
उन्होंने बताया कि मासिक पेंशन में बढ़ोत्तरी राष्ट्रीय सहायता कार्यक्रम (एनएएसपी) तथा समन्वित सामाजिक सहायता कार्यक्रम (आईएसएसएस) के तहत उपलब्ध की गई है। इससे राज्य के वार्षिक बजट में 350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बोझ पडे़गा।
अब कुल बजट 400 करोड़ से बढ़कर 750 करोड़ रुपये हो जाएगा। इस फैसले से कमजोर एवं पिछड़े वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचेगा। राज्य सरकार सभी किस्म की बुनियादी सुविधाएं लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है।
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उन्होंने बताया कि कमजोर तबके के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। इनके बारे में जागरूक किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विशेष विवाह सहायता योजना के लिए अब लड़की को स्वयं हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र देना होगा न कि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का शपथपत्र।
इसी प्रकार विधवा प्रमाणपत्र के लिए स्वयं हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र ही मान्य होगा, जिस पर गांव के दो लोगों के हस्ताक्षर होने चाहिए। अब संबंधित एसएचओ से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं होगी।
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उन्होंने बताया कि मासिक पेंशन में बढ़ोत्तरी राष्ट्रीय सहायता कार्यक्रम (एनएएसपी) तथा समन्वित सामाजिक सहायता कार्यक्रम (आईएसएसएस) के तहत उपलब्ध की गई है। इससे राज्य के वार्षिक बजट में 350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बोझ पडे़गा।
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अब कुल बजट 400 करोड़ से बढ़कर 750 करोड़ रुपये हो जाएगा। इस फैसले से कमजोर एवं पिछड़े वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचेगा। राज्य सरकार सभी किस्म की बुनियादी सुविधाएं लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है।
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उन्होंने बताया कि कमजोर तबके के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। इनके बारे में जागरूक किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विशेष विवाह सहायता योजना के लिए अब लड़की को स्वयं हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र देना होगा न कि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का शपथपत्र।
इसी प्रकार विधवा प्रमाणपत्र के लिए स्वयं हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र ही मान्य होगा, जिस पर गांव के दो लोगों के हस्ताक्षर होने चाहिए। अब संबंधित एसएचओ से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं होगी।