भाजपा से गठबंधन पर पीडीपी में भूचाल, बेग हुए बागी
भाजपा से गठबंधन की संभावना पर पीडीपी में भूचाल की स्थिति पैदा हो गई है। पूर्व डिप्टी सीएम और बारामूला के सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने पार्टी आलाकमान के रवैये से नाराज होकर इस्तीफे की पेशकश की है। बेग ने कहा है कि भाजपा से गठबंधन किसी मजबूरी में नहीं किया जाना चाहिए।
गठबंधन तभी किया जाए जब यह रियासत के राजनीतिक और आर्थिक हित में जरूरी समझा जाए। फिलहाल बेग का संसद से इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के पास है। महबूबा ने बेग से बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश की है।
बेग की बगावत तब सामने आई है जब पीडीपी और भाजपा में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति बन चुकी है और 10 फरवरी तक नई सरकार बनाने की कवायद तेज है।
पार्टी में अपेक्षा के शिकार थे बेग
पार्टी में कद को हिसाब से अहमयित नहीं मिलने पर बेग नाराज चल रहे थे। विधानसभा चुनाव से पहले भी उनकी नाराजगी और पार्टी से अलग होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था लेकिन तब पार्टी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद ने उन्हें मना लिया था।
विधानसभा चुनाव में पार्टी को कश्मीर घाटी से 28 सीट मिलने के बाद भी बेग ने खुद को उपेक्षित ही महसूस किया। सरकार गठन पर भाजपा के महासचिव राम माधव ने सबसे पहले मुजफ्फर हुसैन बेग से ही बातचीत की थी। श्रीनगर में उनके आवास और एक होटल में दो दौर की बातचीत के बाद पीडीपी ने बेग को वार्ता से अलग कर दिया।
पार्टी ने आर्थिक विशेषज्ञ और इस बार विधायक बने डा. हसीब द्राबू को भाजपा के साथ वार्ताकार नियुक्त कर दिया। इतना ही नहीं अन्य नेताओं के साथ बेग पर भी गठबंधन पर बयान देने की रोक लगा दी गई। बेग इससे आहत हुए।
रिफ्यूजियों को जम्मू कश्मीर में नागरिकता की मांग
हांलाकि इस बार उन्हें उस बयान के कारण पार्टी में विरोध झेलना पड़ा जो भाजपा और आरएसएस की नीतियों के समर्थन में था। पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजियों को जम्मू कश्मीर में नागरिकता के मुद्दे पर बेग ने कहा था कि इस मुद्दे पर मानवता के आधार पर पर फैसला होना चाहिए।
यह बयान पीडीपी आलाकमान को रास नहीं आया। आलाकमान ने उन्हें ऐसा बयान नहीं देने की हिदायत दी तो बेग भड़क गए। बेग का कहना है कि पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजी जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं और उन्हें लोकसभा के चुनाव में मतदान का भी अधिकार है।
वह सिर्फ विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सकते हैं। इस मुद्दे पर मानवतावादी दृष्टिकोण से जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुरूप फैसले की बात उन्होंने की थी। बेग ने कहा कि उनका बयान इस्लाम के सिद्धांतों के भी अनुरूप है।
केंद्र में मंत्री पद चाहते हैं बेग
पीडीपी सूत्रों का कहना है कि भाजपा से गठबंधन के बाद बेग केंद्र में मंत्री का पद चाहते हैं। पीडीपी को केंद्र में एक मंत्री पद मिलना लगभग तय है लेकिन पार्टी ने इसके लिए महबूबा मुफ्ती का नाम तय किया है। इससे बेग खफा हैं।
पीडीपी की पिछली सरकार में बेग उप मुख्यमंत्री थे और वित्त मंत्रालय उनके पास था। इस बार रियासत में वित्त मंत्रालय डा. द्राबू को दिए जाने की संभावना है। बेग पीडीपी के संस्थापकों में से एक हैं। उन्हें अब लग रहा है कि पार्टी उनकी जगह डा. द्राबू को ज्यादा अहमियत दे रही है।
बेग की बगावत के बाद दिन भर अफवाहों का दौर चलता रहा। चर्चा रही कि बेग कुछ विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि बेग और पीडीपी आलाकमान ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है।