दुकानदार की हत्या के बाद त्राल में दहशत, फिर सक्रिय हुआ हिजबुल कमांडर रियाज नायकू
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दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल बस स्टैंड में आतंकियों ने आम लोगों के बीच खौफ फैलाने के लिए बुधवार को एक कपड़ा दुकानदार की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना दोपहर बाद लगभग साढ़े तीन बजे उस समय हुई जब मेहराजुद्दीन दुकान के नजदीक खड़ा हुआ था। घटना के बाद से इलाके के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुट गई हैं। इस घटना को किस आतंकी संगठन ने अंजाम दिया, इसका अभी सुराग नहीं मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे आतंकियों ने त्राल बस स्टैंड में ताबड़तोड़ फायरिंग की। फायरिंग की आवाज से अफरातफरी मच गई। शुरुआत में किसी को कुछ समझ नहीं आया कि क्या हुआ, सभी आपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। थोड़ी देर बाद लोगों ने एक युवक को खून ले लथपथ जमीन पर पड़ा पाया। उसे गंभीर अवस्था में नजदीक के अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
मारा गया युवक मेहराजुद्दीन (25) स्थानीय दुकानदार था। उसकी त्राल बस स्टैंड इलाके में कपड़ों की दुकान थी। सूत्रों ने बताया कि जिस समय उसे गोली मारी गई वह दुकान से कुछ दूर खड़ा हुआ था और उसकी दुकान बंद थी। आतंकियों ने उस पर एक के बाद एक तीन गोलियां चलाईं। एक गोली उसके सिर और सीने में लगीं। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबलों द्वारा हमलावरों की तलाश में आस पास के इलाकों की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया।
खौफ पैदा करने के लिए आतंकी दे रहे घटनाओं को अंजाम
बताया जा रहा है कि पांच अगस्त को पूरे प्रदेश में पाबंदियां लगाए जाने के बाद पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियां ठप थीं। इसके बाद धीरे-धीरे दुकानें खुलने लगीं। हाल के दिनों में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग व पुलवामा में बाजार लगभग खुले हुए हैं। लोगों के बीच खौफ कम हुआ है और वह बाहर निकलने लगे हैं। इससे परेशान आतंकी संगठनों ने लोगों में खौफ पैदा करने के लिए इस प्रकार घटना को अंजाम दिया है।
हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर रियाज नायकू हुआ सक्रिय
सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर रियाज नायकू पांच अगस्त के बाद से चर्चाओं से लगभग गायब हो चुका था। पांच अगस्त को जब जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया गया, उसके बाद से सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था के चलते आतंकी किसी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे पाए। ऐसा माना जा रहा है कि लोगों के बीच आतंकियों का खौफ कुछ कम हुआ। माना जा रहा है कि लोगों के बीच दहशत फैलाने के लिए ही उसके गुर्गों नें बुधवार को त्राल की घटना को अंजाम दिया है।
पांच अगस्त के बाद स्थानीय को निशाना बनाने की चौथी घटना
बता दें कि 5 अगस्त के बाद यह चौथी ऐसी हत्या है जिसमें आतंकियों ने स्थानीय लोगों को निशाना बनाया गया हो। इससे पूर्व आतंकियों ने 29 अगस्त को श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पारिमपुरा में एक दुकानदार ग़ुलाम मोहम्मद (65) को निशाना बनाया और मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं 26 अगस्त को भी आतंकियों ने त्राल के जंगलों में एक धोक (अस्थायी रहने की जगह) से राजौरी के अब्दुल कदीर कोहली और श्रीनगर के मंजूर अहमद को अगवा कर मौत के घाट उतार दिया था।
पांच अगस्त के बाद इन लोगों की हुई हत्या
14 अक्तूबर: आतंकियों ने शोपियां ज़िले में राजस्थान के शरीफ खान नाम के एक ट्रक ड्राइवर को मौत के घाट उतार दिया।
16 अूक्तूबर: पुलवामा के निहामा में ईंट के भट्ठे पर काम करने वाले छत्तीसगढ़ के एक मजदूर सेठी साही को मौत के घाट उतार दिया।
16 अूक्तूबर: शोपियां में चरणजीत सिंह और संजय नाम के दो सेब व्यापारियों को गोलियों से निशाना बनाया जिसमें चरणजीत की मौत हो गई जबकि संजय घायल हो गया था।
24 अूक्तूबर: शोपियां में आतंकियों ने गैर स्थानीय ड्राइवर जीवन सिंह (होशियारपुर, पुंजाब) और मोहम्मद एलियास (अलवर, राजस्थान) को मौत के घाट उतारा।
28 अूक्तूबर: बिजबिहाड़ा के कनिलवान इलाके में आतंकियों ने रियासी के नारायण दत नाम के ट्रक ड्राइवर को मौत के घाट उतारा।
29 अूक्तूबरः कुलगाम के कतरसू गांव में आतंकियों ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रहने वाले 5 गैर स्थानीय मजदूरों को मार डाला।