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Jammu News: कुपवाड़ा के टीटवाल में नवनिर्मित पंचलोहा शारदा मंदिर में आज प्रतिष्ठापित होगी मूर्ति

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Panchloha Sharda Temple
अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में एलओसी के टीटवाल गांव में सेव शारदा समिति कश्मीर के ओर से नवनिर्मित शारदा मंदिर और गुरुद्वारा साहिब का बुधवार को शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठापित की जाएगी। इसका शुभारंभ गृहमंत्री अमित शाह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से करेंगे। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष रविंदर पंडिता, ऐजाज़ खान, जोगिंदर सिंह और कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग और स्थानीय लोग उपस्थित रहेंगे।
जानकारी के अनुसार सेव शारदा समिति कश्मीर ने 24 जनवरी को मां शारदा की मूर्ति को कर्नाटक के श्रृंगेरी से उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा के करीब स्थित टीटवाल तक ले जाने के लिए राष्ट्र यात्रा शुरू की। यात्रा बंगलुरु, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, जयपुर, गुड़गांव और जम्मू आदि स्थानों से होते हुए सोमवार को टीटवाल पहुंची। इससे पहले श्रृंगेरी दक्षिणायम शारदा मठ के निमंत्रण पर समिति ने एलओसी टीटवाल में नवनिर्मित शारदा मंदिर के लिए पंचलोहा (5 धातु) मां शारदा की मूर्ति प्राप्त कर नए वाहन से लाया गया।
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खान ने बताया कि जिस जगह मंदिर और गुरुद्वारा था उसी स्थान पर इनका फिर से निर्माण किया जा रहा है। दो दिसंबर 2021 को इसके निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। इस बीच तंगधार निवासी और समिति के सदस्य जोगिंदर सिंह ने बताया कि 11 दिसंबर 2022 को गुरुद्वारे को टेक ओवर किया। अब रोज़ाना यहां पाठ और शबद कीर्तन किया जाएगा। इसकी गूंज एलओसी के पार चिलियाना गांव तक गूंजेगी।
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कबायलियों ने जला दिया था पूरे गांव को
समिति के अध्यक्ष रविंदर पंडिता ने बताया कि पंचलोहा शारदा मूर्ति को चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नवरेह (प्रथम नवरात्र) को टीटवाल मंदिर में 22 मार्च को स्थापित किया जाएगा। समिति के स्थानीय सदस्य एजाज खान ने बताया कि 1947 से पहले यहां पर एमएमजी (मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा) हुआ करता था। इसके बाद बाद हुए कबायली हमले में इस टीटवाल गांव को जला दिया था। हमने सोचा कि एक बार फिर से मज़हब से ऊपर उठकर इंसानियत का एक नया मज़हब बनाया जाए। इसलिए यह शुरुआत की और यह संदेश विश्व में देना चाहते हैं। हमने इन सभी धर्म स्थलों को दोबारा से बनाने की शुरुआत की, ताकि एक बार फिर से मंदिर से पूजा, मस्जिद से अज़ान और गुरुद्वारे से शबद-कीर्तन की आवाजें एक बार फिर से गूंजें।
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