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Jammu News: पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त बना रहे जम्मू-कश्मीर के कानूनों को केंद्र ने सराहा
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पंचायती राज विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया बेहतरीन प्रयास, 11 और राज्यों को भी मिली सराहना
गौरव रावत
जम्मू। पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में लागू कानूनों की केंद्र सरकार ने सराहना की है। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए जम्मू-कश्मीर में लागू प्रावधानों को सबसे अच्छी प्रथा बताया है। बता दें कि इसी रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर को पंचायतों में विकेन्द्रीकरण के मामले केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अव्वल बताया गया है।
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लागू प्रावधानों की सराहना करते हुए कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के पंचायती राज अधिनियम में यह प्रावधान है कि राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाएगी। इस समिति के अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होंगे। समिति में सदस्यों के रूप में मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक वरिष्ठ मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, पंचायत प्रभारी मंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने में राज्य सरकार के पास एकमात्र अधिकार नहीं होना चाहिए। इस प्रावधान से राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में नियंत्रण और संतुलन रहेगा।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को भी मिली सराहना
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के अलावा 11 और राज्यों के बेहतरीन प्रयासों की सराहना की गई है। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत अधिकारी के लिए खाली पदों को भरे जाने और पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने के लिए ऑनलाइन ऑडिट प्रणाली के अपनाने को अच्छा प्रयास बताया है। हरियाणा में सरपंच पति या प्रतिनिधि जैसी प्रथा को समाप्त करने और विभिन्न योजनाओं के ऑडिट के लिए स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट इकाई की स्थापना की तारीफ की है। उत्तराखंड में पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड सामाजिक ऑडिट जवाबदेही एवं पारदर्शिता एजेंसी (यूएसएटीए) की स्थापना की गई। केंद्र सरकार ने इसे उत्तराखंड सरकार का बेहतरीन प्रयास बताया है। हिमाचल प्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों के संचालन की निगरानी के लिए डेटा प्रोफाइलर प्रबंधन सूचना प्रणाली (डीपीएमआईएस) के उपयोग को अपनाया। इसके तहत चुनाव की शुरुआत से लेकर मतगणना तक की प्रकिया की सारी जानकारी ऑनलाइन दी जाती है। केंद्र सरकार ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा है कि दूसरे राज्य पंचायत को चुनावों में सुधार के लिए इस तरह के उपाय अपनाने चाहिए।
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गौरव रावत
जम्मू। पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में लागू कानूनों की केंद्र सरकार ने सराहना की है। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए जम्मू-कश्मीर में लागू प्रावधानों को सबसे अच्छी प्रथा बताया है। बता दें कि इसी रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर को पंचायतों में विकेन्द्रीकरण के मामले केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अव्वल बताया गया है।
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लागू प्रावधानों की सराहना करते हुए कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के पंचायती राज अधिनियम में यह प्रावधान है कि राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाएगी। इस समिति के अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होंगे। समिति में सदस्यों के रूप में मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक वरिष्ठ मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, पंचायत प्रभारी मंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने में राज्य सरकार के पास एकमात्र अधिकार नहीं होना चाहिए। इस प्रावधान से राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में नियंत्रण और संतुलन रहेगा।
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उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को भी मिली सराहना
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के अलावा 11 और राज्यों के बेहतरीन प्रयासों की सराहना की गई है। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत अधिकारी के लिए खाली पदों को भरे जाने और पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने के लिए ऑनलाइन ऑडिट प्रणाली के अपनाने को अच्छा प्रयास बताया है। हरियाणा में सरपंच पति या प्रतिनिधि जैसी प्रथा को समाप्त करने और विभिन्न योजनाओं के ऑडिट के लिए स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट इकाई की स्थापना की तारीफ की है। उत्तराखंड में पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड सामाजिक ऑडिट जवाबदेही एवं पारदर्शिता एजेंसी (यूएसएटीए) की स्थापना की गई। केंद्र सरकार ने इसे उत्तराखंड सरकार का बेहतरीन प्रयास बताया है। हिमाचल प्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों के संचालन की निगरानी के लिए डेटा प्रोफाइलर प्रबंधन सूचना प्रणाली (डीपीएमआईएस) के उपयोग को अपनाया। इसके तहत चुनाव की शुरुआत से लेकर मतगणना तक की प्रकिया की सारी जानकारी ऑनलाइन दी जाती है। केंद्र सरकार ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा है कि दूसरे राज्य पंचायत को चुनावों में सुधार के लिए इस तरह के उपाय अपनाने चाहिए।
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