कश्मीर में तालिबानी आतंकियों को धकेलने की साजिश रच रहा पाकिस्तान, मुख्य खतरा आत्मघाती हमले
- पाकिस्तानी सेना कश्मीर में हमलों की साजिश रचने के लिए आतंकवादियों की संख्या बढ़ा रही है। कुख्यात तालिबानी आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की 28 सिंध बटालियन के साथ हैं। मुख्य खतरा तालिबान का आत्मघाती दस्ता है, जिसे पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकी हमले के लिए प्रशिक्षण देने के लिए कहा है। खुफिया एजेंसियों ने इसे लेकर सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया है।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में नौशेरा सेक्टर के सामने नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सेना के साथ दो तालिबान आतंकवादियों सहित दर्जन भर अन्य आतंकवादी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने की साजिश रच रहे हैं। खुफिया एजेंसियों ने इसे लेकर सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया है।
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि कुख्यात तालिबानी आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की 28 सिंध बटालियन के साथ हैं और घुसपैठ की फिराक में हैं। पाकिस्तानी सेना विशेष सेवा समूह (एसएसजी) द्वारा कश्मीर में हमलों की साजिश रचने के लिए आतंकवादियों की संख्या बढ़ा रही है।
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खुफिया एजेंसियों ने यह भी बताया है कि अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद में एसएसजी द्वारा कश्मीर में मिशन के लिए 20 तालिबानी आतंकवादियों के एक समूह को तैयार किया जा रहा है। पाकिस्तान तालिबानी आतंकियों को शरण देने के लिए जाना जाता है।
यहां तक कि अलकायदा के उदय के दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन को सैन्य सहायता प्रदान करता रहा है। अलकायदा ने जलालाबाद में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के कुख्यात खुफिया एजेंसी के सहयोग से आतंकी शिविर बनाए हैं। जलालाबाद की रिपोर्ट देश में आतंकवाद विरोधी एजेंसियों के लिए अधिक चिंताजनक है, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में तालिबानी आतंकवादियों को लांच करने की तैयारी कर रहा है।
मुख्य खतरा तालिबान का आत्मघाती दस्ता है
मुख्य खतरा तालिबान का आत्मघाती दस्ता है, जिसे पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकी हमले के लिए प्रशिक्षण देने के लिए कहा है। खुफिया इनपुट ने सुझाव दिया है कि पाकिस्तान को उन्हें धीरे-धीरे लांच करना है। इसमें आईएसआई भी शामिल है, क्योंकि आईएसआई के समर्थन के बिना इन आतंकवादियों का घुसपैठ करना असंभव है।
सूत्रों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तायैबा उन आतंकवादी संगठनों में शामिल हैं जो जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ये आतंकी संगठन पूर्वी प्रांत कुनार, नंगरहार और नूरिस्तान में हैं, जहां वे अफगान तालिबान की छत्रछाया में काम करते हैं। सूत्रों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का नेतृत्व नूर वली महसूद और उनके डिप्टी कारी अमजद कर रहा है। समूह के बारे में माना जाता है कि कुंअर में लगभग 500 और नंगरहार में लगभग 180 लड़ाकू आत्मघाती हैं।