एलओसी के किसानों पर पाकिस्तान की गोलियों का कहर
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आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था। सीमावर्ती क्षेत्रों में धान की रोपाई शुरू होते ही पाकिस्तानी रेंजरों ने अपनी नापाक हरकत शुरू कर दी है। इस बार शुरूआत अरनिया सेक्टर से हुई है। सरहद की खेती को प्रभावित करने के पीछे पाकिस्तान की बड़ी साजिश रही है।
वह सीमावर्ती किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर कर वहां से हर हालत में पीछे हटने के लिए मजबूर करना चाहता है, क्योंकि सीमा पार से घुसपैठ में सीमावर्ती ग्रामीण बड़ी बाधा हैं।
जवानों संग ग्रामीणों की तालमेल भी अच्छी है। वह एक तरह से भारत की सुरक्षा दीवार भी हैं, जो पाकिस्तान को बर्दाश्त नहीं। रविवार की देर शाम पाकिस्तानी रेंजरों ने अपनी रणनीति के तहत पहले दो पोस्टों पर फायर किए। इसके बाद मोर्टार दागने शुरू कर दिए।
किसानों के पलायन करने की साजिश रच रहा है पाक
चौकस जवानों ने धान की खेती के काम में जुटे सीमावर्ती ग्रामीणों और बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। गोलाबारी के प्रभाव में आने वाले क्षेत्र को खाली भी करवा दिया, ताकि जानी नुकसान से बचा जा सके।
गौरतलब है कि हर वर्ष धान की रोपाई और कटाई के समय पाकिस्तानी रेंजर गोलाबारी शुरू कर देते हैं। इस बार भी इसकी आशंका जताई जा रही थी। इसकी वजह से किसान सहमे भी थे।
रविवार शाम को सीमा पार से गोलाबारी के बाद यह साबित हो गया है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आने वाला। पिछले साल भी इसी रणनीति के तहत धान की खेती के समय पाकिस्तानी रेंजरों ने जमकर गोले बरसाए थे।
तब उनके कहर से बचने के लिए सीमावर्ती ग्रामीण अपनी लहलहाती फसल को छोड़ शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर हुए थे। किसानों को तब काफी नुकसान झेलना पड़ा था।
सरहद पर दहशत का माहौल बनाने की कोशिश
एक तरफ अमरनाथ यात्रा तो दूसरी तरफ सीमावर्ती क्षेत्रों में धान की खेती। सरहद के उस पार बैठे दहशतगर्द दोनों को प्रभावित करने की कोशिश में हैं, जिसमें अब तक वह असफल रहे हैं।
रविवार शाम रेंजरों की तरफ से शुरू की गई गोलाबारी उसी रणनीति का हिस्सा रहा। देर रात अंधाधुंध गोलाबारी साबित करती है कि रेंजर बौखलाहट में हैं। वह हर हालत में सीमा पर दहशत का माहौल कायम रखना चाहते हैं। इन दोनों चुनौतियों का सामना बीएसएफ कर रही है।
दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे जवान
सीमा पर जवान दोहरी जिम्मेदारी का निभा रहे। एक तरफ जहां वह घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर रहे हैं, वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती प्रभावित न हो, इसका भी वह खयाल रख रहे। रविवार की देर रात भी उन्होंने एक तरफ नापाक हरकत का जवाब दिया, तो दूसरी तरफ श्रमिकों और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।