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पाकिस्तान की डिजिटल घुसपैठ: आतंकी नेटवर्क को मिल रहा सपोर्ट, जम्मू-कश्मीर में भेजे जा रहे अवैध टेलीकॉम सिग्नल

Sun, 31 May 2026 04:21 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 31 May 2026 04:21 PM IST
सार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पार से अवैध टेलीकॉम सिग्नल जम्मू-कश्मीर में भेजकर आतंकी नेटवर्क और जेलों में बंद आतंकियों को संचार सहायता देने की कोशिश कर रहा है। ये सिग्नल जम्मू क्षेत्र के कई संवेदनशील जिलों और जेलों तक पहुंच रहे हैं। 

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Pak beaming rogue telecom signals to aid terror networks
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार से जानबूझकर अवैध और अनधिकृत टेलीकॉम सिग्नल जम्मू-कश्मीर में भेज रहा है, जिसका उद्देश्य आतंकी संगठनों को गुप्त संचार सुविधा उपलब्ध कराना और जेलों में बंद आतंकियों तक संपर्क बनाए रखना है।

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अधिकारियों ने बताया कि खासतौर पर जम्मू क्षेत्र को निशाना बनाया जा रहा है, जहां पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में लगाए गए मोबाइल टावरों के सिग्नल भारतीय सीमा के भीतर तक पहुंच रहे हैं। ये सिग्नल कठुआ, राजोरी, पुंछ और जम्मू की संवेदनशील कोट भलवाल जेल तक पाए गए हैं।
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सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति विशेषकर जम्मू के मैदानी इलाके इन अवैध सिग्नलों को रोक नहीं पा रहे हैं और जेलों में बंद आतंकियों द्वारा अवैध मोबाइल उपकरणों के जरिए संपर्क बनाए रखने की आशंका बढ़ गई है।
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अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा जैमर तकनीक कई स्थानों पर इन सिग्नलों को पूरी तरह रोकने में असफल रही है। इसके चलते अब जेलों और संवेदनशील क्षेत्रों में नई और उन्नत तकनीक लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है जो केवल संदिग्ध डिवाइस को ही निष्क्रिय कर सके।


सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान की यह गतिविधि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार नियमों का उल्लंघन है और यह संयुक्त राष्ट्र की टेलीकम्युनिकेशन यूनियन  के मानकों के भी खिलाफ है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आतंकी संगठन अब एडवांस्ड एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी और चुनौतीपूर्ण हो गई है। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि पहले की तरह इस बार भी इन अवैध नेटवर्कों को निष्क्रिय कर दिया जाएगा।

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