'जो दिखते हैं अपने, वही दे रहे आतंकियों को रास्ता': OGW की मदद से हुआ बायसरन नरसंहार; रचा आतंक का ब्लूप्रिंट
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) का पूरा समर्थन मिल रहा है, जो रेकी, शरण, हथियार पहुंचाने और हमलों की योजना में मदद करते हैं। बायसरन घाटी नरसंहार समेत कई हमलों में ओजीडब्ल्यू की भूमिका उजागर हुई है।
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देश को हिला देने वाले बायसरन घाटी नरसंहार को ओजीडब्ल्यू की मदद से अंजाम देने की बात सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने बायसरन दौरे के दौरान यह संकेत भी दिया था। पहलगाम की बायसरन घाटी में आतंकी हमले से 17 दिन पहले, कुछ लोग पहलगाम के उन होटलों की रेकी कर रहे थे, जहां ज्यादा टूरिस्ट ठहरते हैं। ये लोग आतंकी नेटवर्क का हिस्सा थे।
रेकी का मकसद था कश्मीर घूमने आए लोगों पर हमला। होटलों से बात नहीं बनी तो 15 अप्रैल से पहलगाम के आसपास के फेमस पार्क और घाटियों में रेकी शुरू की गई।
15 मिनट में 26 निर्दोषों की हत्या
फिल्मों की शूटिंग से मशहूर हुई बेताब घाटी, अरू घाटी और फेमस एम्यूजमेंट पार्क की रेकी के बाद बायसरन घाटी को हमले के लिए चुना गया। वजह- पहलगाम आने वाले टूरिस्ट यहां जरूर आते हैं। यहां सिक्योरिटी नहीं होती है और आने-जाने का रास्ता ऐसा नहीं है कि हमले के बाद आर्मी तेजी से पहुंच सके। जानकारों का कहना है कि ये सारी सूचनाएं आतंकियों को उनके ओजीडब्ल्यू नेटवर्क से ही मिली थी। आतंकियों ने जैसा सोचा था,वही हुआ। उन्होंने वहां जाकर 15 मिनट की ताबड़तोड़ फायरिंग में 26 बेगुनाहों को मौत के घाट उतार दिया।
पहलगाम में 20 दिन पहले शुरू हुई रेकी
ओजीडब्ल्यू ने इस दरम्यान आतंकियों के खाने पीने से लेकर उनको उनके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की। घटना के बाद पर्यटकों ने उस क्षेत्र में ऐसे लोगों को सक्रिय देखा जिनकी गतिविधियां संदिग्ध थीं।सूत्रों की माने तो आतंकी बायसरन घाटी में हमले से करीब 20 दिन पहले पहलगाम आ गए थे।
स्थानीय सपोर्ट और ओवरग्राउंड वर्कर्स की मदद से उन्होंने टारगेट चुनने के लिए रेकी शुरू की। उनकी नजर पहलगाम के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे होटल, पार्क और पर्यटन स्थलों पर थी। सबसे पहले 4 अप्रैल को होटलों की रेकी की गई। 10 दिन तक होटलों की रेकी का काम चला। 15 अप्रैल से पहलगाम के आसपास के पार्क और घाटी की रेकी शुरू की गई। वहां दाल न गली तो बायसरन में कहर मचा दिया।
पुंछ में आतंकियों के साथ OGW की मिलीभगत
इसी तरह पुंछ में वर्ष 2023 में बींबर गली क्षेत्र में सैन्य वाहन पर हुए आतंकी हमले के बाद दो ओजीडब्लयू को गिरफ्तार किया गया था। इन्होंने आतंकियों को शरण देने के साथ ड्रोन के जरिए पीओके से आए हथियारों को प्राप्त कर आतंकियों तक पहुंचाया था। इसी के साथ राजोरी जिले के ढांगरी में अल्पसंख्यकों के नरसंहार में आतंकियों को सहयोग देने वाले दो ओजीडब्लयू को पुंछ जिले के उप जिला मेंढर से दबोचा गया जो अभी तक जेल में बंद हैं।
1500 छापे, 100 से ज्यादा ओजीडब्ल्यू पर पीएसए के तहत कार्रवाई
कश्मीर संभाग में ओजीडब्ल्यू नेटवर्क-कश्मीर संभाग के बारामुला, सोपोर, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम में ओजीडब्ल्यू का नेटवर्क इस कदर फैला है कि सुरक्षाबलों को उसे तोड़ने नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। ओजीडब्ल्यू के संदेह में अब तक 3000 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा चुकी है। इनमें 1500 के वहां छापे डाले जा चुके हैं। 100 से ज्यादा ओजीडब्ल्यू के खिलाफ पीएसए (पब्लिक सेक्योरिटी एक्ट) के तहत कार्रवाई की जा चुकी है। दस ओजीडब्ल्यू के घर गिराए जा चुके हैं।
कश्मीर में स्लीपिंग माड्यूल के खिलाफ एसआईए का बड़ा अभियान
मध्य, उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर में इन स्लीपिंग माड्यूल के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत शनिवार को एसआईए ने उनके 11 ठिकानों पर छापे मारे। कई हिरासत में लिए गए हैं। इन छापों के दौरान बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई और कई संदिग्धों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। जांच में पता चला है कि ये आतंकवादी सहयोगी, सक्रिय रूप से आतंकवादी साजिश में शामिल हैं और भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त आतंकियों की मदद कर रहे हैं।
18 से 22 वर्ष आयु वर्ग के युवा मुख्य रूप से प्रभावित
एसआईए ने पाया है कि ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण में शामिल अधिकांश 18 से 22 वर्ष आयु वर्ग के युवा हैं। एसआईए ने इस संबंध में शिक्षकों, माता-पिता और साथियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कुछ जरूरी सलाह जारी की है। कहा गया है कि उन्हें युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की सूचना स्थानीय पुलिस अधिकारियों को देनी चाहिए ।
ओजीडब्ल्यू का काम करने का तरीका
आतंकवादी संगठनों के लिए विभिन्न कार्यों में शामिल होते हैं, जैसे कि आतंकवादियों को शरण देना, ओजीडब्ल्यू आतंकवादियों को अपने घरों या अन्य स्थानों पर शरण देते हैं।
ओजीडब्ल्यू आतंकवादियों को हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने में मदद करते हैं।
आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराना: ओजीडब्ल्यू आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने में मदद करते हैं।
आतंकवादियों के लिए जासूसी करना: ओजीडब्ल्यू आतंकवादियों के लिए जासूसी करते हैं और महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करते हैं।
ओजीडब्ल्यू की सक्रियताये जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं, जिनमें शामिल हैं:
शहरी क्षेत्र: ओजीडब्ल्यू शहरी क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जहां वे आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन और हथियार इकट्ठा करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र : ओजीडब्ल्यू ग्रामीण क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं, जहां वे आतंकवादियों को शरण देते हैं और आतंकवादी गतिविधियों के लिए लोगों के बीच उनको मसीहा साबित करने के लिए उनका ब्रेनवाश करते हैं।
सुरक्षा बलों के लिए चुनौती
ओजीडब्ल्यू सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। ये लोग आतंकवादी संगठनों के लिए काम करते हैं और सुरक्षा बलों को चकमा देने में माहिर होते हैं। सुरक्षा बलों को ओजीडब्ल्यू की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कारण यह कि ये आम लोगों के बीच के होते हैं और उनके बीच उनकी साफ सुथरी छवि होती है। ऐसे में सुरक्षा बल कोई सुराग मिलने पर जब उनके खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचते हैं तो लोग उनके समर्थन में खड़े हो जाते हैं। ओजीडब्ल्यू बनाए जाने का तरीका - ओजीडब्ल्यू को आतंकवादी संगठन विभिन्न तरीकों से भर्ती करते हैं, जिनमें शामिल हैं:- विचारधारा: आतंकवादी संगठन लोगों को अपनी विचारधारा से प्रभावित कर ओजीडब्ल्यू बना सकते हैं।
धमकी: आतंकवादी संगठन लोगों को धमकी देकर ओजीडब्ल्यू बना सकते हैं।
लालच: आतंकवादी संगठन लोगों को धन और अन्य लाभ का लालच देकर ओजीडब्ल्यू बना सकते हैं।
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