फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   J&K: In Jammu and Kashmir, the challenge comes more from traitors than from the enemy; terrorists are getting

J&K: जम्मू-कश्मीर में दुश्मन से ज्यादा घर के भेदियों से चुनौती; ओजीडब्ल्यू नेटवर्क से आतंकियों को मिल रही ताकत

Sun, 18 May 2025 01:41 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sun, 18 May 2025 01:41 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जीवित रखने में ओवर ग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, जो आतंकी गतिविधियों के लिए सूचनाएं, रसद और पनाहगाह मुहैया कराते हैं। 

विज्ञापन
J&K: In Jammu and Kashmir, the challenge comes more from traitors than from the enemy; terrorists are getting
कश्मीर में घरों पर एसआईए की रेड - फोटो : SIA

विस्तार

 एक कहावत है घर का भेदी लंका ढाए। जम्मू कश्मीर में आतंकियों को खाद पानी ऐसे ही घर के भेदियों से मिल रही है। सुरक्षाबलों ने इन्हें ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) का नाम दिया है। इनका विस्तार इतना है कि सुरक्षाबलों के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

विज्ञापन


इनके नेटवर्क का अंदाजा लगाना इसलिए मुश्किल हो रहा है कि ये जाहिरा तौर पर निष्क्रिय रहते हैं। इसलिए इनको स्लीपिंग सेल भी कहा जाता है, मगर अपने आतंकी आकाओं के लिए ये आंख, कान हैं। सीमाओं के साथ साथ समूचे प्रदेश में इनकी उपस्थिति दहशतगर्दों की बहुत बड़ी ताकत और सुरक्षाबलों के लिए उतना ही बड़ा सिरदर्द है। 

विज्ञापन

J&K: In Jammu and Kashmir, the challenge comes more from traitors than from the enemy; terrorists are getting
कश्मीर में घरों पर एसआईए की रेड - फोटो : SIA

आतंकवाद की जड़ में ओवर ग्राउंड वर्कर की भूमिका
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने में ओवर ग्राउंड वर्करों की हमेशा ही भूमिका सामने आती रही है। भारत पाकिस्तान सीमा और एलओसी से घुसपैठ के बाद पहाड़ी इलाकों तक पहुंचने के लिए मदद, असलह पहुंचाने और खान आदि मुहैया करवाने के अलावा मुखबिरी कर सुरक्षाबलों की मूवमेंट की जानकारी के लिए आतंकी ओवर ग्राउंड वर्करों का इस्तेमाल करते रहे हैं।

पिछले एक दशक में जम्मू कश्मीर में सामने आए कई मामलों में सरकारी नौकरी में शामिल लोगों के भी ओवर ग्राउंड वर्कर होने के मामले सामने आते रहे हैं। यहीं नहीं यह ओवरग्राउंड वर्कर आतंकियों को पनाह देने और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने में भी मदद करते रहे हैं।

J&K: In Jammu and Kashmir, the challenge comes more from traitors than from the enemy; terrorists are getting
कश्मीर में घरों पर एसआईए की रेड - फोटो : SIA

ड्रोन के जरिए हथियारों की सप्लाई का खुलासा
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तीन साल पहले तक हथियार, गोला बारूद और नकदी आतंकियों तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल करता नजर आया। बाकायदा इन ड्रोन के लिए लोकेशन तय होती और यहां से ओवर ग्राउंड वर्कर सामान आतंकियों तक पहुंचाते रहे हैं।

सुरक्षाबलों की जांच में यह भी साफ हो चुका है कि इससे पहले आतंकी घुसपैठ के बाद हाईवे पर सुरक्षित सफर करने के लिए कई ट्रक चालकों को भी ओवर ग्राउंड वर्करों के रूप में इस्तेमाल कर चुके हैं। ट्रक में कैविटी बनाकर कश्मीर तक ले जाने के इस मामले का भंडाफोड़ झज्जर कोटली इनकाउंटर में हो चुका है।

विज्ञापन

जम्मू संभाग में फिर सक्रिय हुआ आतंकवाद
इसी तरह से जम्मू संभाग में आज के समय में फिर पिछले एक साल में सिर उठा चुके आतंकवाद में लंबे समय तक आतंकियों के पहाड़ों पर छिपे रहने, राशन आदि की सप्लाई रखने से लेकर सुरक्षित ठिकानों तक मूवमेंट करने में भी स्लीपर सेल और ओवरग्राउंड वर्करों की मदद सामने आती रही है। कठुआ में ऐसे नेटवर्क का पिछले एक साल में सुरक्षा एजेंसियां भंडाफोड़ भी कर चुकी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed