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Pahalgam Attack: सीमा पर तनाव बढ़ा, कुछ बड़ा होने की आशंका से घिरे लोग; हमले के बाद जवानों की बढ़ी आवाजाही

Fri, 25 Apr 2025 03:13 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 25 Apr 2025 03:13 PM IST
सार

सीमा पर तनाव बढ़ने और कुछ बड़ा होने की आशंका से लोग घिर गए। पहलगाम में पर्यटकों पर हमले के बाद सुरक्षा बलों की आवाजाही बढ़ गई है। भारत के सख्त कदम से खुश है। पर दोनों देशों के संबंधों में खटास बढ़ने से खौफ भी बढ़ गया है। 

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Pahalgam Attack Tension Escalates at Border Troop Movement Intensifies After Attack Details in Hindi
Pahalgam Attack - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहलगाम में पर्यटकों पर हमले और केंद्र सरकार के सख्त फैसलों के बाद सीमावर्ती इलाकों के लोग तनाव बढ़ने की आशंका से घिरे हैं। हीरानगर, पुंछ, अरनिया, आरएसपुरा समेत जम्मू व श्रीनगर संभाग के सीमावर्ती इलाकों में लोगों के भीतर खौफ भी बढ़ा है और प्रशासन की हलचल भी। 
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वहीं सर्च ऑपरेशन भी तेज हुए हैं। लोग कुछ बड़ा होने की आशंका से घिरे हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर बीएसएफ की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। कई इलाकों में लगे मोर्टार की सफाई भी करते देखे गए हैं जवान। 
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सीमा सुरक्षा बल के जवानों और प्रशासन ने ग्रामीणों के साथ बैठकें करनी शुरू कर दी हैं। इन सब आशंकाओं के बीच अमर उजाला की टीम ने सीमावर्ती इलाकों के लोगों से बात की और उनकी आशंकाओं और चिंताओं को जाना। पेश है अमर उजाला टीम की एक रिपोर्ट।
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बीते चार साल से सुकून था...पर अब अनहोनी डरा रही
सीमावर्ती पुंछ जिले में सावजियां से लेकर बालाकोट तक की 110 किमी लंबी नियंत्रण रेखा पर बसे गांवों में रहने वाले ग्रामीण कुछ बड़ा होने की आशंका से ग्रस्त हैं। नियंत्रण रेखा पर बन रहे इन हालातों के वे पाकिस्तान को ही कोस रहे हैं।

नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव जलास सलोत्री, जिनके बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र तेत्रिनोट की मात्र 100 मीटर दूरी है, दोनों के बीच केवल पुलस्तय नदी बह रही है। इन गांव के ग्रामीण केतन बाली, पुरुषोत्तम लाल, शादी लाल, लक्की कुमार, अमन डाबर आदि का कहना है कि पिछले चार वर्षों से नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी बंद होने से हम लोग काफी सुकून में थे। गांव में विकास भी तेजी से हो रहा था। 
 

पिछले एक महीने से पाकिस्तानी सेना की तरफ से हमारे क्षेत्र में दो से तीन बार गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया गया था, तो हमें हालात बिगड़ने की शंका होने लगी थी। कहते हैं कि एक बार पाकिस्तान के साथ आर-पार की जंग जरूरी है। कारगिल के समय हम लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा था। केतन बाली का कहना है कि अब तो केंद्र सरकार ने गांव में अच्छी खासी संख्या में बंकर बनवाए हैं, जिससे अब हम लोग गांव में भी सुरक्षित रह सकते हैं।

नहीं चाहते अब की पुराने दिन लौट आएं
जिला सांबा के सीमावर्ती गांवों में भी लोगों की रातों की नींद अनहोनी की आशंका में उड़ी हुई है। कहते हैं कि अब नहीं चाहते हैं कि पुराने दिन देखने पड़ें। वो वक्त भी देखा है जब घरों के ऊपर से मोर्टार के गोले गूंज के साथ गुजरते थे। एक चौक पर बरगद के पेड़ के नीचे कुछ बुजुर्ग आपस में इसी को लेकर चर्चा कर रहे थे। सीमा के 500 मीटर दूर गांव चक सददा के बुजुर्ग यश पाल का कहना था कि कारगिल युद्ध के दौरान भी उन्हें अपने गांव से पलायन करना पड़ा था। 

पूर्व नंबरदार राज कुमार का कहना है कि जब भी कोई घटना होती है तो लोग ही अधिक प्रभावित होते हैं। सीमावर्ती गांव मुठी झारू के सेवानिवृत्त कैप्टन उत्तम सिंह ने कहा कि गत वर्ष 2012 में वह अपने खेत में काम करने गया था, पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी शुरू कर दी गई। वह एक नाले में काफी देर तक लेटा रहा, गोलीबारी थमने के बाद ही वह अपने घर पहुंचा था। 

 

चक दुलमा के पूर्व सरपंच विनय शर्मा, गांव चच्वाल के सोहन सिंह, हरी सिंह के अनुसार, उन्होंने ग्रामीणों को पहले से ही सचेत कर दिया है। इस बीच क्षेत्र में मोर्टार की सफाई करते जवानों को देख भी लोगों ने यह चर्चा शुरू कर दी है कि कुछ भी हो सकता है।

किसानों की चिंता व सुरक्षाबलों की आवाजाही बढ़ी
सीमा पर संयुक्त रूप से बीएसएफ और पुलिस तलाशी अभियान चला रही है। सुरक्षा बलों की आवाजाही पहले के मुकाबले ज्यादा हो रही है। दोनों देशों के बीच माहौल तनावपूर्ण होने के चलते अरनिया सेक्टर के सीमावर्ती क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। क्षेत्र में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में मशीन क्षेत्र में फसल की कटाई के लिए पहुंच रही हैं। 

सीमावर्ती गांव चांनना के किसान जनक राज ने कहा कि तनावपूर्ण माहौल के बीच पाकिस्तान की तरफ से कभी भी गोलीबारी शुरू हो सकती है। जिसके चलते किसानों को गेहूं की फसल की चिंता लगी हुई है। अगले 20 दिनों गेहूं की फसल समेटने में लग जाएंगे। किसान सतपाल ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग वैसे ही पिछड़े हुए हैं। ऊपर से माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
 

दोपहर को चिलचिलाती धूप में भी फसल को समेट रहे सीमावर्ती किसान
पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसलों के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी न शुरू कर दे, यह डर लोगों को सता रहा है। सीमावर्ती किसान गेहूं की फसल को लेकर चिंतित हैं और तेजी से इसे समेटने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पहाड़पुर से लेकर बोबिया तक एक हजार एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल है, जिसमें से करीब 40 प्रतिशत की ही कटाई अभी तक हो पाई है। 
 

पर्याप्त कंबाइन न मिलने पर किसान खुद दोपहर को चिलचिलाती धूप में भी कटाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि सीमा पार भी फसल पूरी तरह से तैयार है और वहां भी कटाई का काम तेज हो गया है और हो सकता है कि पाकिस्तान इसी का इंतजार कर रहा हो कि उनकी तरफ कटाई होते ही वह फिर से सीजफायर का उल्लंघन करे। इसलिए यहां भी किसानों को सीमित समय में कटाई का काम खत्म करना होगा, जिसे लेकर किसान चिंतित हैं, लेकिन पहलगाम की घटना के बाद से इन लोगों में भी पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा है और पाकिस्तान पर कोई बड़ी कार्रवाई की मांग भी की है। 

गुज्जर चक निवासी कुलदीप वर्मा ने कहा कि वह कभी भी आईबी पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर सकता है। सीमा पर प्रशासन की भी हलचल बढ़ी है। वीरवार को एसडीएम फुलेल सिंह ने अधिकारियों के साथ मढ़ीन तहसील के गांव पहाड़पुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और तारबंदी के नजदीक फसल कटाई के बारे में जानकारी ली। पहाड़पुर में बीएसएफ की चौकी पर बीएसएफ के अधिकारियों से बैठक की और सीमा पर सुरक्षा के साथ-साथ फसल कटाई के मुद्दे पर बात की।

 

कुछ किसानों ने अपने खेतों से सीमा पार कटाई की मशीनें चलती देखी हैं और हो सकता है कि पाकिस्तान इसी का इंतजार कर रहा हो। उस तरफ कटाई का काम खत्म होते ही पाकिस्तान गोलाबारी कर सकता है, इसका डर लोगों में जरूर है। कर्ण अत्री, अशोक शर्मा ने कहा कि सीमा पर फसल को लेकर फिलहाल किसान परेशान हैं, पर पाकिस्तान के भीतर घुसकर उसे सबक सिखाना चाहिए।

गश्त भी बढ़ी, जवानों की संख्या भी...फसल घरों तक पहुंचाना शुरू
सीमांत गांव पूर्व सरपंच सर्वण लाल भगत का कहना है कि इन दिनों अधिकतर किसान सीमावर्ती क्षेत्र में खेतों में पककर तैयार गेहूं की फसल समेट सुरक्षित घरों में पहुंचा रहे हैं। गश्त के साथ-साथ जवानों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। भारतीय व पाकिस्तान क्षेत्र में किसान कंबाइन मशीन के साथ कटाई करते दिखाई दे रहे हैं। सुचेतगढ़ गांव के किसान रतन लाल का कहना है कि पाकिस्तान पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

सीमांत गांव अब्दुल्लिया के चमन लाल, गांव चन्दू चक्क के सरदारी लाल का कहना है कि सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए बंकर तो बनाए गए हैं और उनके रख-रखाव बेहतर नहीं। अन्य बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण परेशान हैं। सीमा क्षेत्र में रह रहे इन लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। गांव कोराटना के सुनील चौधरी का कहना है कि उनका गांव जीरो लाइन से दो किमी की दूरी पर होने पर अगर जरूरत पड़ी तो लोग अपनी सुरक्षा कैसे कर पाएंगे। सुरक्षा रामभरोसे ही है।

घाटी में आक्रोश और तनाव दोनों
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम के बायसरन में हुए घातक आतंकवादी हमले में पर्यटकों की जान जाने पर जहां पूरे देश भर के साथ-साथ घाटी के लोगों में भी आक्रोश है, इस बीच बॉर्डर क्षेत्रों में रहने वाले लोग कहते हैं कि लोग खौफ के साये में जी रहे हैं। बारामुला के उड़ी सेक्टर में रहने वाले आमिर आफताब ने कहा कि घाटी में खासकर हमारे बॉर्डर क्षेत्र में काफी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। जिस तरह कल केंद्र सरकार ने भी कुछ आदेश जारी किए हैं, उससे काफी ज्यादा तनाव फैल चुका है। हमारा एरिया फौज के साथ मिल-जुलकर रहने वाला है।

बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कल भी घुसपैठ को नाकाम किया, दो आतंकवादी मार गिराए गए। आफताब ने कहा कि सरहदों के लोग अमन चाहते हैं। हम हमेशा अपनी भारतीय फौज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। बॉर्डर टूरिज्म शुरू हुआ था, उसपर भी असर पड़ा है। कुपवाड़ा जिले के बॉर्डरों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। मच्छिल सेक्टर के आसिफ अहमद ने कहा कि लोगों में डर तो है। भारत सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कार्रवाई को अंजाम न दे, अगर ऐसा होता है तो उसकी जवाबी कार्रवाई में इन क्षेत्रों के लोग प्रभावित होंगे। बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर के नजीर अहमद ने कहा कि गुरेज जीरो पॉइंट पर होने के कारण एक खौफ का माहौल है। दुआ करते हैं कि दोनों देशों के बीच अमन बरकरार रहे।

रिपोर्ट-मुनीश शर्मा,अमृत पाल सिंह बाली, सुभाष चंद्र, अरुण खजूरिया, प्रीत चौधरी, राजीव लंगेह, विनोद शर्मा
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