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पैसे के लिए लगा रहे जिंदगी का दाव

Wed, 13 May 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 13 May 2015 12:32 AM IST
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overloading in public transport a big problem

मुनाफा कमाने के लिए चालक और सह चालकों की ओर से इंसानी जिंदगियों को दांव पर लगाकर ओवर लोडिंग की जा रही है। पहाड़ी इलाकों में दौड़ने वाले ऐसे वाहनों पर सफर करना लोगों के लिए जोखिम बना हुआ है। सरकारी बसें भी इन लोकल रूटों पर क्यों नहीं चलती हैं, विभागीय अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। एसएसपी ट्रैफिक मोहन लाल के मुताबिक पिछले माह में मात्र जम्मू में मेटाडोर और बसों के 1200 चालान काटे जा चुके हैं।

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भविष्य में भी ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसा जाएगा। गौरतलब है कि उधमपुर (लाटी) में सोमवार की सुबह बस के तीन फीट गहरी खाई में गिरने का एक कारण यह भी रहा है कि बस में सवारियां क्षमता से ज्यादा थीं, जिस कारण बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई और 24 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। जम्मू से कटड़ा, श्रीनगर, किश्तवाड़, राजोरी, पुंछ, डोडा, रामबन, उधमपुर के लिए जितनी भी बसें चलती हैं, बस वह स्टैंड से पूरी तरह से ठसाठस भर कर निकलती हैं।
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पांच से छह फीट तक इन पर सामान लदा होता है। बीच रास्ते में भी सवारियां चढ़ती हैं। बस स्टैंड के इंदिरा चौक में हर रोज बसों की छतों पर भारी-भरकम सामान लदा जाता है, जिनकी कोई पूछताछ नहीं करता है। बताया जा रहा है कि पहाड़ी इलाकों में दौड़ने वाली कुछ बसें ऐसी हैं, जिनका इंजन पुराना है और सिर्फ ढांचा ही नया लगाया जाता है। यातायात विभाग कैसे इन वाहनों को मंजूरी देता है, यह समझ से परे है।
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जम्मू से ओवरलोड बसें नहीं जाती हैं। बीच रास्ते में हो रही है तो उसका उन्हें पता नहीं।
मोहन लाल, एसएसपी ट्रैफिक

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