{"_id":"69c935416007ceb036069f39","slug":"over-30-000-manuscripts-from-jammu-and-kashmir-have-joined-gyan-bharatam-2026-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मन की बात’: जम्मू-कश्मीर में 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां ज्ञान भारतम से जुड़ीं, 70 हजार तक पहुंचने का लक्ष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मन की बात’: जम्मू-कश्मीर में 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां ज्ञान भारतम से जुड़ीं, 70 हजार तक पहुंचने का लक्ष्य
Sun, 29 Mar 2026 07:51 PM IST
Nikita Gupta
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
Published by: Nikita Gupta
Updated Sun, 29 Mar 2026 07:51 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में 30 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां ज्ञान भारतम पोर्टल और एप से जोड़कर डिजिटल रूप में संरक्षित की गई हैं, जबकि अभियान के तहत 70 हजार पांडुलिपियों को सुरक्षित करने का लक्ष्य है।
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की पहल पर पूरे देश में दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में भी 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां संरक्षित हो चुकी हैं। इन्हें ज्ञान भारतम पोर्टल और एप से जोड़ा गया है। जून 2026 तक चलने वाले अभियान के तहत 70 हजार से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित करने का लक्ष्य है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम एप से जोड़ने का आह्वावन किया। कहा कि इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है। इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम, ज्ञान भारतम एप है। आपके पास कोई पांडुलिपि है या उसके बारे में जानकारी है तो उसकी फोटो ज्ञान भारतम एप पर जरूर साझा करें।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री के इस आह्वान को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से वृहद प्रयास चल रहा है। अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय के नेतृत्व में अभी तक प्रदेश में चिह्नित करीब 33 हजार में से 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां संरक्षित कर एप पर लोड की जा चुकी हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय का फारसी विभाग प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
विज्ञापन
बेचने या गिरवी रखने वालों को उचित दाम देने का प्रस्तावअभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय के निदेशक केके सिद्धा ने अभी इसी माह केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार में पांडुलिपियों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने की ट्रेनिंग प्रतिभागियों को दी थी। उन्होंने बताया था कि श्री वैष्णो माता श्राइन बोर्ड भी पांडुलिपि प्रदान कर रहा है। संबंधित अधिकारी गांव-गांव जाकर इसकी तलाश करेंगे। बेचने और गिरवी रखने वालों को उचित रकम भी देने का प्रस्ताव है।