{"_id":"61673d9d7b6e953bed707fe1","slug":"on-mahashtami-there-was-an-influx-of-faith-in-the-temples-of-mahamai-jammu-city-news-jmu2457322152","type":"story","status":"publish","title_hn":"कंजक पूजन के साथ आज पूर्ण होगी महामाई की आराधना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कंजक पूजन के साथ आज पूर्ण होगी महामाई की आराधना
विज्ञापन
जम्मू। महाष्टमी पर बुधवार सुबह से भी भक्तों का महामाई के मंदिरों में तांता लगा रहा। भक्तों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए अलसुबह ही पहुंचना शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा। इसमें शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में भक्तजनों ने दरबार में पहुंचकर मां का आशीर्वाद लिया। बावे वाली माता, महामाया मंदिर, नगरोटा स्थित कोल कंडोली मंदिर, पक्का डंगा स्थित मां लक्ष्मी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दिनभर भक्तों की भीड़ लगी रही।
उधर, महानवमी पर वीरवार को कंजक पूजन और साख विसर्जन के साथ शारदीय नवरात्र संपन्न होंगे। बहते जल में मां की पवित्र साख प्रवाहित की जाएगी। इस दौरान सूर्य पुत्री तवी नदी सहित अन्य जलस्थलों पर भक्तों का हुजूम पहुंचेगा। अष्टमी पर बुधवार को भी कुछ श्रदालुओं ने साख विसर्जन किया। लेकिन अधिकांश नवमी पर ही करेंगे। इस बीच विजय दशमी की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है, हालांकि कोविड महामारी के कारण इस साल भी सार्वजनिक स्थलों पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले दहन करने की रस्म अदा नहीं की जाएगी। लेकिन लोगों स्थानीय स्तर पर पर्व को मनाएंगे।
नवमी पर सुबह ही कंजकों की पूजा कर आशीर्वाद लिया जाएगा। बदले में कंजकों को पारंपरिक हलवा पूड़ी के अलावा अन्य गिफ्ट दिए जाएंगे। कंजकों की टोलियां भी मोहल्लों में घूमकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। नवमी के लिए खरीदारी को बाजारों में बुधवार को भीड़ रही। इसमें मां की आस्था से जुड़ी जरूरी खरीदारी की गई। कुछ लोगों ने बुधवार अष्टमी पर ही कंजक पूजन कर नवरात्र संपन्न कर दिए, लेकिन अधिकांश भक्तजन नवमी पर ही साख विसर्जन करके नवरात्र का समापन करते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तजन व्रत रखते हैं। अष्टमी पर भी भक्तों ने व्रत रखकर मां के प्रति अपनी आस्था जताई। पंडित देवीदास शास्त्री ने बताया कि वीरवार को नवमी पर दिनभर साख विसर्जन का मुहूर्त है, लेकिन इसे सूर्यास्त से पहले किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
उधर, महानवमी पर वीरवार को कंजक पूजन और साख विसर्जन के साथ शारदीय नवरात्र संपन्न होंगे। बहते जल में मां की पवित्र साख प्रवाहित की जाएगी। इस दौरान सूर्य पुत्री तवी नदी सहित अन्य जलस्थलों पर भक्तों का हुजूम पहुंचेगा। अष्टमी पर बुधवार को भी कुछ श्रदालुओं ने साख विसर्जन किया। लेकिन अधिकांश नवमी पर ही करेंगे। इस बीच विजय दशमी की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है, हालांकि कोविड महामारी के कारण इस साल भी सार्वजनिक स्थलों पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले दहन करने की रस्म अदा नहीं की जाएगी। लेकिन लोगों स्थानीय स्तर पर पर्व को मनाएंगे।
विज्ञापन
नवमी पर सुबह ही कंजकों की पूजा कर आशीर्वाद लिया जाएगा। बदले में कंजकों को पारंपरिक हलवा पूड़ी के अलावा अन्य गिफ्ट दिए जाएंगे। कंजकों की टोलियां भी मोहल्लों में घूमकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। नवमी के लिए खरीदारी को बाजारों में बुधवार को भीड़ रही। इसमें मां की आस्था से जुड़ी जरूरी खरीदारी की गई। कुछ लोगों ने बुधवार अष्टमी पर ही कंजक पूजन कर नवरात्र संपन्न कर दिए, लेकिन अधिकांश भक्तजन नवमी पर ही साख विसर्जन करके नवरात्र का समापन करते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तजन व्रत रखते हैं। अष्टमी पर भी भक्तों ने व्रत रखकर मां के प्रति अपनी आस्था जताई। पंडित देवीदास शास्त्री ने बताया कि वीरवार को नवमी पर दिनभर साख विसर्जन का मुहूर्त है, लेकिन इसे सूर्यास्त से पहले किया जाए।
विज्ञापन