केंद्र पाक से बातचीत के विरोध में, उमर सरकार समर्थन में
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वीरवार को परिषद में केंद्र सरकार पर पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने के लिए राज्य सरकार से आग्रह करने का प्रस्ताव पेश किया गया। विधान परिषद के चेयरमैन की ओर से पेश किया गया यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया।
प्रस्ताव पर पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस एक सुर में दिखे जबकि कांग्रेस असहज नजर आई। भाजपा का कोई सदस्य परिषद में नहीं है और इकलौते पैंथर्स सदस्य रफीक शाह ने इसे देश विरोधी करार देते हुए इसका विरोध करते हुए वाकआउट कर दिया।
वीरवार को परिषद के चेयरमैन अमृत मल्होत्रा द्वारा पेश प्रस्ताव में भारत-पाक वार्ता को साउथ एशिया की खुशहाली के लिए जरूरी बताया गया है। साथ ही पाकिस्तानी गोलाबारी से पीड़ित लोगों के पुनर्वास और उनकी आर्थिक सहायता के लिए भी आवश्यक कार्यवाही करने की राज्य सरकार से प्रस्ताव में मांग की गई है।
उमर सरकार पर पाक मामले में नरम रुख का आरोप
प्रस्ताव में कांग्रेस के एलओसी के साथ साथ आईबी को भी जोड़ने के संशोधन की मांग मान ली गई। उल्लेखनीय है कि बुधवार को नेशनल कांफ्रेंस के परिषद में सदस्य देवेंद्र राणा ने केंद्र सरकार पर पाक से वार्ता शुरू किए जाने की मांग के संबंध प्रस्ताव पेश किया था।
इस पर जमकर हंगामा हुआ था और इसके बाद सभी दलों की बैठक में चेयरमैन द्वारा इस संबंध में वीरवार को प्रस्ताव पेश किए जाने पर सहमति बनी थी। कांग्रेस सदस्यों ने सरहद पर साजगार माहौल होने पर ही भारत-पाक वार्ता की वकालत से संबंधित संशोधन चेयरमैन के प्रस्ताव पर पेश किया, लेकिन सहयोगी और सत्ताधारी दल नेकां के विरोध पर कांग्रेस को इसे वापस लेना पड़ा।
कांग्रेस सदस्यों रवींद्र शर्मा, गुलाम नबी मोंगा, जहांगीर मीर और नरेश महाजन ने इस संशोधन पर जोरदार पक्ष रखा, लेकिन नेकां सदस्यों द्वारा वोटिंग एवं बहस कराने की मांग के आगे कांग्रेस बेबस दिखी। इस दौरान नेकां एमएलसी डॉ. बशीर अहमद वीरी और कांग्रेस एमएलसी नरेश महाजन के बीच तीखी बहस भी हुई। यह संशोधन कांग्रेस की तरफ से एमएलसी मागरे और नरेश महाजन ने पेश किया था।
भारत पाक के बीच फिक्स है मैच
इससे पूर्व चर्चा में भाग लेते हुए नेकां एमएलसी खालिद नजीब सुहराबर्दी ने कहा कि असल में भारत-पाक के बीच मैच फिक्स है। इस मैच में जम्मू कश्मीर फुटबाल बना हुआ है। कभी भारत तो कभी पाकिस्तान किक मारता है। हुर्रियत नेताओं के सिर्फ पाकिस्तानी राजदूत के साथ चाय पीने से केंद्र को पाकिस्तान से वार्ता बंद नहीं करनी चाहिए। मौजूदा हालात तनाव बढ़ाने की इजाजत नहीं देते। इसलिए वार्ता होनी चाहिए।
कांग्रेस एमएलसी मागरे और जहांगीर मीर ने कहा कि सीमांत इलाकों में रहने वाले नुमाइंदे ही सीमा पार से फायरिंग का दंश जानते हैं। इन दोनों ने पहले माहौल साजगार बनाने और बाद में वार्ता शुरू करने की वकालत की।
जहांगीर मीर ने कहा कि पाकिस्तान के अंदरूनी सियासी हालात खराब होने की वजह से पाकिस्तानी अवाम का ध्यान भटकाने के लिए सीमा पार से फायरिंग हो रही है। कांग्रेस एमएलसी रवींद्र शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ इतना चाहती है कि प्रस्ताव से सरहदी इलाकों के अवाम की भावनाएं आहत न हों।
पीडीपी एमएलसी नईम अख्तर ने कहा कि आखिर कब तक जम्मू कश्मीर की जनता भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का शिकार बनती रहेगी। इसलिए भारत-पाक वार्ता इंसानियत और अमन के हक में है। कांग्रेेस के बी आर कुंडल ने एलओसी के साथ आईबी शब्द जोड़ने का संशोधन पेश किया।
पैंथर्स एमएलसी रफीक शाह का कहना था कि यह असल में राज्य सरकार का सब्जेक्ट ही नहीं है। किसी भी देश से वार्ता करना अथवा नहीं करना यह राष्ट्रीय नीति का हिस्सा होता है। राज्य सरकार यह तय नहीं कर सकती।
स्पीकर ने कहा कुछ नहीं कर सकते, तुम्हारी सरकार तुम संभालो
विधान परिषद ने भारत-पाक के बीच वार्ता शुरू किए जाने के लिए प्रस्ताव पारित कर दिया, लेकिन, विधानसभा में स्पीकर ने पाकिस्तानी फायरिंग पर प्रस्ताव करने की मांग खारिज कर दी। स्पीकर मुबारक गुल ने कहा कि रियासत सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती। इस मसले को केंद्र सरकार को सुलझाना है।
भाजपा विधायकों के विरोध पर गुल ने कहा कि केंद्र में सरकार आप ही की है, जाइए अपने प्रधानमंत्री से बात कीजिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या आपको अपनी सरकार पर भरोसा नहीं ? स्पीकर द्वारा मांग ठुकराए जाने पर भाजपा विधायकों ने सदन से वाकआउट किया।
बिश्नाह के भाजपा विधायक अश्वनी कुमार ने पाकिस्तान द्वारा लगातार हो रही गोलाबारी पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पीकर से इस मुद्दे पर सदन द्वारा प्रस्ताव पेश करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगातार गोलाबारी कर सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। फ्लैग मीटिंग भी सफल साबित नहीं हुई।
बैठक के बावजूद पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, जिसके कारण बार्डर पर रह रहे लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। सरकार अभी तक चुप बैठी है और उनकी ओर से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। भाजपा विधायक ने इस मुद्दे पर हंगामा भी किया। निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद की भारत सरकार पर टिप्पणी पर भाजपा विधायक ने उन्हें सदन से बाहर निकालने की भी मांग की।