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जयंती पर अवकाश: उमर अब्दुल्ला के विवादित बयान ने रखी थी छुट्टी की नींव, 20 साल बाद मांग पूरी

Fri, 16 Sep 2022 02:55 PM IST
kumar गुलशन कुमार ओमपाल सांब्याल, जम्मू
ओमपाल सांब्याल, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 16 Sep 2022 02:55 PM IST
सार

अनुच्छेद 370 हटने के बाद महाराजा के शासनकाल के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती का राजकीय अवकाश रद्द किया गया। इस घटनाक्रम ने भी महाराजा के जन्मदिन पर अवकाश की मांग को हवा दे दी।

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Omar abdullah controversial statement laid foundation of maharaj hari singh jayanti holiday after 20 years de
Jammu - फोटो : निखिल मेहता

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के चौथे और अंतिम महाराजा हरि सिंह के जन्मदिन पर छुट्टी पर भले ही अब जाकर मुहर लगी हो लेकिन इसकी बुनियाद नेशनल कांफ्रेंस के तत्कालीन अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के 20 साल पहले विवादित बयान ने रख दी थी। 19 सितंबर 2002 की शाम सांबा में चुनावी सभा के दौरान उमर ने कथित रूप से कहा था, हमने महाराजा का तब तक पीछा किया जब तक वो जम्मू-कश्मीर छोड़ कर चले नहीं गए। इस बयान पर सांबा में भारी बवाल हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद कर दिया गया।

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उमर के बयान से पहले चुनावी सियासत में महाराजा हरि सिंह कभी मुद्दा नहीं बने थे। लेकिन इस घटना के बाद से महाराजा हरि सिंह के सम्मान में छुट्टी के लिए विधानसभा और विधान परिषद में प्रस्ताव लाए गए। जम्मू नगर निगम ने दो बार प्रस्ताव पारित कर मंजूरी के लिए सरकार को भेजा। 
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सियासी हलकों में भी महाराजा हरि सिंह का नाम डोगरा अस्मिता से जोड़कर पेश किया जाने लगा। अनुच्छेद 370 हटने के बाद महाराजा के शासनकाल के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती का राजकीय अवकाश रद्द किया गया। इस घटनाक्रम ने भी महाराजा के जन्मदिन पर अवकाश की मांग को हवा दे दी।
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आइडेंटिटी पॉलिटिक्स की विशेषज्ञ और जम्मू यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान विभाग में असिसटेंट प्रोफेसर एलोरा पूरी कहती हैं, 'महाराजा को जम्मू में डोगरा अस्मिता का प्रतीक माना जाता है। शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने 1931 की घटना को लेकर महाराजा के शासन के खिलाफ आंदोलन चलाया था। जम्मू में लोग मानते हैं कि महाराजा के खिलाफ चलाया गया आंदोलन जम्मू के खिलाफ था। उमर अब्दुल्ला के 2002 में चुनावी बयान पर भी इस वजह से भारी विरोध हुआ, लेकिन महाराजा की जयंती पर छुट्टी के मुद्दे के पीछे कई कारण रहे हैं। जम्मू में एक बड़े वर्ग की भावनाएं महाराजा हरि सिंह से जुड़ी हुई हैं। ये भावनाएं पिछले कुछ वर्षों से लगातार मुखर हो रहीं हैं जिसका असर जम्मू संभाग की सियासत पर पड़ना लाजी है।'

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