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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Officials said on J&K voter list after abolition of Article 370 Representation of People Act 1950 effective

Voter List: अनुच्छेद 370 के साथ हट चुका जे एंड के रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1957, ये भी कर सकेंगे वोट

Thu, 18 Aug 2022 06:12 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 18 Aug 2022 06:12 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची पर छिड़ी बहस पर अधिकारियों ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 प्रभावी होता है। जिसके प्रावधान अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी प्रभावी हैं। पदस्थ अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में व्यवसाय, शिक्षा या तैनाती के तहत सामान्य नागरिक बन कर रह रहे देश के अन्य राज्यों के लोग भी यहां मतदाता बन सकते हैं। 

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Officials said on J&K voter list after abolition of Article 370 Representation of People Act 1950 effective
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

अनुच्छेद 370 हटने के साथ ही जम्मू-कश्मीर रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1957 भी निरस्त हो चुका है। जम्मू-कश्मीर में अब चूंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट) 1950 और 1951 लागू है, जिसके प्रावधान अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी प्रभावी हैं। पदस्थ अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में व्यवसाय, शिक्षा या तैनाती के तहत सामान्य नागरिक बन कर रह रहे देश के अन्य राज्यों के लोग भी यहां मतदाता बन सकते हैं। 

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बुधवार को मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से बाहरी प्रदेशों के लोगों को मतदाता बनने की सुविधा संबंधी बयान दिया गया था। विपक्षी दल इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अनुच्छेद 370 के रहते जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में केवल प्रदेश के स्थायी निवासी ही वोटर बन सकते थे। लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में भी वही नियम लागू होंगे, जो अन्य प्रदेशों और राज्यों में हैं। मतदाता सूचियों में विशेष सारांश संशोधन में साधारणतः नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं। हालांकि साधारणतः नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में मतदाता बनने के लिए पहले अपने पैतृक क्षेत्रों में मतदाता सूची से अपना नाम कटवाना होगा। कानून के तहत देश का कोई भी नागरिक दो स्थानों से मतदाता (वोटर) नहीं हो सकता है।

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संसदीय चुनाव में 32 हजार गैर स्थायी नागरिकों ने डाले थे वोट
गत संसदीय चुनाव में जम्मू-कश्मीर में 32 हजार गैर स्थायी नागरिकों ने मतदान किया था। इस बार विधानसभा चुनाव में भी नियमों के तहत गैर स्थायी नागरिक फार्म छह भकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा सकेंगे। बूथ स्तर के अधिकारी जोकि स्थानीय क्षेत्र से ही होंगे, वह चुनाव पंजीकरण अधिकारी के तौर पर काम करेंगे और फार्म छह भरने वाले लोगों द्वारा मुहैया करवाई गई जानकारी की जांच करेंगे। जम्मू-कश्मीर में पिछले चार सालों से मतदाता सूचियों का विशेष सारांश संशोधन नहीं हुआ है। ऐसे में प्रदेश में 18 प्लस लेगों की जनसंख्या करीब 98,96,000 पर पहुंच चुकी है जबकि मतदाता सूचियों में 76,02,397 लोगों का ही पंजीकरण अब तक हुआ है। ऐसे में नई मतदाता सूचियों में 22,93,603 मतदाताओं की बढ़ोतरी हो सकती है। 

कश्मीरी विस्थापितों के मामले में कोई बदलाव नहीं
कश्मीरी विस्थापितों के मामले में प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पहले की तरह ही विधानसभा क्षेत्र आधार पर कश्मीरी विस्थापितों का पंजीकरण होगा। इसके लिए जम्मू, उधमपुर और दिल्ली में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।

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सशस्त्र बल सर्विस वोटर बन सकेंगे
सशस्त्र बलों के मामले में सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ आदि के जवानों का सर्विस वोटर के तौर पर पंजीकरण करवाने का प्रावधान है। वहीं, शांति वाले क्षेत्रों में ड्यूटी दे रहे सशस्त्र बलों के जवान शांति वाले स्टेशन में आम मतदाता के तौर पर भी खुद का पंजीकरण करवा सकते हैं।

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