एसएसपी जुगल की शौर्यगाथा...100 आतंकी ढेर कर चुके अफसर की पसली में 12 साल से फंसी है गोली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शरीर की पसलियों के बीच मांसपेशियों में गोली फंसी पड़ी है। दर्द होने पर पेन किलर का सेवन करते हैं। डॉक्टरों ने कहा है कि अभी इसे निकालने में कुछ वक्त लगेगा। लेकिन जम्मू कश्मीर पुलिस के अफसर जुगल मन्हास को इसका कोई फर्क नहीं पड़ता।
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की पहचान रखने वाले जुगल मन्हास अपने सेवाकाल में सौ से ज्यादा आतंकी ढेर कर चुके हैं लेकिन आतंकी हमले में लगी पांच गोलियों में से एक को वह बारह साल से शरीर में लेकर जी रहे हैं।
राजोरी के एसएसपी जुगल मन्हास शरीर में गोली फंसे होने के बावजूद ड्यूटी से कभी पीछे नहीं रहते। जुगल कहते हैं कि कुछ समय पहले आपरेशन के लिए बात की थी। डॉक्टरों ने कहा है कि अभी कुछ वक्त लगेगा लिहाजा वह इंतजार कर रहे हैं। लेकिन ड्यूटी निभाना अपनी जगह है।
2002 में आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया
जुगल मन्हास डोडा के रहने वाले हैं। वर्ष 2002 में वह पुंछ जिले के मेंढर में बतौर डीएसपी तैनात हुए। तब पुंछ में आतंकवाद चरम पर था। वह घर से कार्यालय के लिए निकले तो रास्ते में आतंकियों ने हमला बोल दिया। उनकी बाजू, पैर सहित पूरे शरीर में पांच गोलियां लगीं।
पुलिस टीम के पहुंचने पर उनकी सांसें चल रही थीं। तत्काल उन्हें हेलीकॉप्टर से जम्मू के मेडिकल कालेज पहुंचाया गया। यहां उनकी चार गोलियां तो निकाल दी गईं, लेकिन एक शरीर के अंदर ही रही। उन्हें एम्स भेज दिया गया। यहां डॉक्टरों ने कहा कि गोली ऐसी जगह जाकर फंस गई है, जिसको तुरंत निकालने पर उनकी जान जा सकती है।
अब तक 30 से अधिक आतंकियों के खिलाफ चलाए जाने वाले ऑपरेशन को जुगल लीड कर चुके हैं। 100 से अधिक आतंकियों को मार चुके हैं। बहादुरी के लिए राष्ट्रपति सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। वह आतंकवाद ग्रस्त इलाकों में ही अधिकतर तैनात रहते हैं।
पुंछ में कई साल रहने के बाद वह अब राजोरी जिले में हैं। इसी साल उन्होंने आगे बढ़कर सुंदरबनी में घुसे चार आतंकियों के खिलाफ चलाए आपरेशन को लीड किया। बिना किसी नुकसान के चारों आतंकी ढेर कर दिए गए।