‘सब मर ही गए तो मुझे भी मारकर जला डालो’
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...और झल्ला उठा मयंक। कहने लगा- तुम सब पागल हो गए हो। मैं कैसे मान लूं कि मम्मी-पापा, दादा, नानी और मामा की मौत हो गई। अगर यह सच है तो मुझे भी मारकर जला डालो। जाओ मैं नहीं मानता...।
दर्दनाक सड़क हादसे में मारे गए केएएस अधिकारी कल्याण सिंह के इकलौते बेटे की ये बातें सुनकर मनहूस मौके पर मौजूद सारे रिश्तेदार, दोस्त और ग्रामीण ठिठक गए। सबको जैसे सांप सूंघ गया।
फिर किसी की हिम्मत नहीं पटी कि उसे मुखाग्नि देने के लिए तैयार करे। यहां तक कि सोलह साल का सलोना मयंक माता-पिता और दादा जी के अंतिम संस्कार में गया भी नहीं।
जहां एक ही परिवार से तीन अर्थियां एक साथ निकले वहां के हालात क्या हो सकते हैं, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। जिस बेटे के सिर से मां-बाप का साया उठ गया। दादा का प्यार छिन गया, उसकी हालत भला सामान्य कैसे रह सकती है।
माता-पिता, दादा, नानी और मामा की मौत से टूट गया मयंक
हंसते-खेलते परिवार में इस तरह की त्रासदी का तो मयंक ने कभी कल्पना भी नहीं किया होगा। खुशहाल परिवार का यह बच्चा तो बस दसवीं बोर्ड की परीक्षा की तैयारी में जुटा था। तभी तो दादा के शव के साथ घर नहीं जा रहा था। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
भगवान ने मयंक के दादा जी के साथ माता-पिता, नानी और मामा को भी छीन लिया। भला अब वह रोए भी किसके पास। शायद यही सोच कर उसकी आंखें पथरा गई थीं। जब तीन अर्थियां घर से निकल रही थी तो दादी सिर और छाती पीट-पीट कर दहाड़ें मार रही थीं, लेकिन मयंक की आंखें सूखी थीं। सुध-बुध खो बैठा था।
जैसे वह इस गमगीन और मनहूसियत के मेले से अपने को बिल्कुल अलग कर लिया हो। रिश्तेदारों और दोस्तों के लाख मनाने के बावजूद वह जब माता-पिता को मुखाग्नि देने को तैयार नहीं हुआ तो कल्याण सिंह के बड़े भाई शादी लाल ने पैतृक गांव जोधपुर में चिनाब दरिया के किनारे चिता को आग दी।
दूसरी ओर इसी हादसे में मारे गए कल्याण सिंह की सास सोमा देवी और साले विंकल को भी उनके अपने पैतृक गांव टेंसना में अंतिम संस्कार किया गया।