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रियासत में सड़क हादसों की संख्या बढ़ी
ब्यूरो/ अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 20 Feb 2016 01:10 AM IST
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रियासत में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि पर सरकार ने चिंता जताई है। सड़क हादसों में मौतों की राष्ट्रीय औसत से दोगुनी संख्या जम्मू-कश्मीर में है।
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सचिवालय में सड़क सुरक्षा मुद्दे पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में राज्यपाल एनएन वोहरा ने चिंता जताते हुए कहा कि रियासत में प्रति वर्ष 6000 से ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं और इनमें एक हजार लोगों की जान गई हैं। मरने वालों की संख्या राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। प्रत्येक साल आठ हजार से ज्यादा लोग घायल हो रहे हैं।
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राज्यपाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस संबंध में 14 फरवरी 2015 को उच्च स्तरीय बैठक हुई थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद हादसों को रोकने के लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाए गए।
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राज्यपाल ने निर्देश दिए कि वह अपने स्तर से सड़क सुरक्षा के लिए हर तरह से प्रयास करें। राज्यपाल ने कहा कि ओवरलोडिंग और अनफिट वाहनों के खिलाफ सख्ती बरती जाए। अनफिट वाहनों को सड़क पर उतरने न दिया जाए। साथ ही कोई भी अयोग्य व्यक्ति को निजी, ट्रांसपोर्ट या कामर्शियल वाहन चलाने की इजाजत न दी जाए।
राज्यपाल ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी सशक्त टास्क फोर्स को कहा कि सड़क सुरक्षा से संबंधित तमाम आवश्यक निर्णय 23 फरवरी, 2016 तक ले लें। यह टास्क फोर्ट भविष्य में भी प्रत्येक माह एक बार बैठक करे और सड़क सुरक्षा की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने मुख्य सचिव को रोड सेफ्टी एक्शन प्लान 20 दिनों के अंदर पूरा करने के आदेश दिए।
इसके लिए आवश्यक एग्जीक्यूटिव या विधायी अनुमोदन की प्रक्रिया 15 मार्च, 2016 तक पूरी कर लें। गृह और परिवहन प्रशासनिक सचिव वित्त व कानून विभाग से तमाम क्लीयरेंस सुनिश्चित करे और ट्रैफिक मैनेजमेंट फ्रेमवर्क 20 मार्च, 2016 से लागू हो जाए।
हाल ही में अनुमोदित स्टेट रोड सेफ्टी पालिसी पर आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। इससे जुड़े तमाम मुद्दों को ट्रांसपोर्ट विभाग 25 फरवरी को राज्य प्रशासनिक काउंसिल के समक्ष पेश करे। बैठक में राज्यपाल के सलाहकार परवेज दीवान, मुख्य सचिव, वित्त सचिव आदि थे।