अब जम्मू में अशांति फैलाने की साजिश: संभाग में दो माह के भीतर 6 धमाके, कई जगह विस्फोटक बरामद
जम्मू संभाग में आतंकवाद खत्म हो गया है, इसलिए आतंकी संगठन यहां आतंकवाद को दोबारा जिंदा करना चाहते हैं। एक कारण कश्मीर में आतंकियों की विफलता भी है। आतंकी संगठन जम्मू संभाग में सुरक्षाबलों को व्यस्त करना चाहते हैं।
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पहले उधमपुर, फिर राजोरी और अब जम्मू। कहीं संदिग्ध धमाके हुए तो कहीं पर धमाके करने की साजिश। एक महीने के भीतर ही सात बार धमाके होना अपने आप में एक बड़ी साजिश है। जम्मू संभाग में आतंकी किसी बड़े हमले की फिराक में हैं। लगातार होने वाली इन साजिशों ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीते एक महीने की घटनाओं पर गौर किया जाए तो साफ दिख रहा है कि जम्मू संभाग पर एक बड़ा आतंकी खतरा मंडरा रहा है। इसका सबूत सुंजवां आतंकी हमले से मिल भी चुका है। आतंकी संगठनों की ओर से लगातार आतंकी साजिशें रचकर जम्मू और इसके आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल पैदा किया जा रहा है। ठीक दो महीने के बाद अमरनाथ यात्रा शुरू होने जा रही है। ऐसे में यह साजिशें चिंता का विषय बनी हुई है।
कहां कब हुए विस्फोट
9 मार्च: उधमपुर में संदिग्ध धमाका हुआ
26 मार्च: राजोरी के कोटरंका में आधे घंटे के भीतर दो विस्फोट हुए
16 अप्रैल: राजोरी के राजोरी गार्डन रोड पर सड़क किनारे आईईडी बरामद की गई
19 अप्रैल: राजोरी के कोटरंका में संदिग्ध धमाका हुआ
24 अप्रैल: बिश्नाह के गांव ललियान में संदिग्ध धमाका हुआ
25 अप्रैल: कोटरंका में संदिग्ध धमाका हुआ
28 अप्रैल: सिद्दड़ा हाईवे पर डेढ़ किलो की दो आईईडी बरामद की गईं
22 अप्रैल को सुंजवां में जैश ए मोहम्मद के दो फिदायीन आतंकियों ने हमला करने का प्रयास किया, हालांकि इसमें वह विफल हो गए। यह हमला कई तरह के सवाल खड़े कर गया। आतंकियों ने सीमा पार से घुसपैठ की और जम्मू तक पहुंच गए। यहीं नहीं, इनको जम्मू पहुंचाने वाले जब पकड़े गए तो पता चला कि वह पहले भी आतंकियों को बार्डर से कश्मीर ले जा चुके हैं। ऐसे में यह हमला विफल होने पर जैश बड़े हमले करने की साजिश रच रहा है।
शांत जम्मू को अशांत करने की साजिश
जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि जम्मू संभाग में आतंकवाद खत्म हो गया है, इसलिए आतंकी संगठन यहां आतंकवाद को दोबारा जिंदा करना चाहते हैं। एक कारण कश्मीर में आतंकियों की विफलता भी है। आतंकी संगठन जम्मू संभाग में सुरक्षाबलों को व्यस्त करना चाहते हैं, ताकि कश्मीर में आतंकी वारदातों को बढ़ा सकें। विस्फोट के पीछे एक ही वजह है कि जम्मू में अशांति फैलाई जाए। इसके लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर भी मदद मिल रही है। लिहाजा जम्मू में आतंकियों का स्लीपर सेल बड़े स्तर पर सक्रिय हैं। जिस पर अंकुश लगाने के लिए खुफिया एजेंसियों को और सतर्क होना पड़ेगा। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि सीमा पार से लगातर घुसपैठ हो रही है, लेकिन असर कोई नहीं हो रहा।