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Jammu News: सीयू में अब नए नियमों के आधार पर होगी पदोन्नति
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) जम्मू की पुरानी पदोन्नति की अधिसूचना को वापस लेकर नए नियमों के तहत जारी अधिसूचना को मंजूरी दे दी है।
कोर्ट ने यह फैसला एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस याचिका में नई अधिसूचना को चुनौती दी थी। अब विश्वविद्यालय में नए नियमों पर आधारित प्रक्रिया पर ही पदोन्नति होगी।
मामला केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक रजिस्ट्रार पद की पदोन्नति से जुड़ा है। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2019 में कैडर भर्ती नियम- 2016 के तहत पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की थी। कोविड महामारी और कुलपति का कार्यकाल बढ़ने के कारण यह प्रक्रिया लंबित रह गई।
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इस बीच वर्ष 2022 में नए कैडर भर्ती नियम लागू कर दिए गए। विश्वविद्यालय ने इन्हीं नए नियमों के तहत 2023 और 2024 में नई अधिसूचनाएं जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू की।
याचिकाकर्ता, जो विश्वविद्यालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत हैं, ने दावा किया कि वह पुराने नियमों के अनुसार पदोन्नति के पात्र थे क्योंकि वे पांच वर्षों की आवश्यक सेवा पूरी कर चुके थे। उनका कहना था कि पहले की अधिसूचना के तहत विभागीय परीक्षा भी हो चुकी थी, ऐसे में नई अधिसूचना जारी करना उनके साथ अन्याय है।
न्यायमूर्ति संजय धर की एकल पीठ ने कहा कि कर्मचारी यह नहीं कह सकते कि जब पद रिक्त हुए थे उस समय जो नियम लागू थे केवल उन्हीं के अनुसार पद भरे जाएं। पीठ ने कहा कि सेवा मामलों में वही नियम लागू होते हैं जो नियुक्ति के समय प्रभावी होते हैं। इसलिए विश्वविद्यालय का नई अधिसूचना के जरिए पदोन्नति प्रक्रिया को नए नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने का निर्णय पूरी तरह से उचित और विधिसम्मत है।
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कोर्ट ने यह फैसला एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस याचिका में नई अधिसूचना को चुनौती दी थी। अब विश्वविद्यालय में नए नियमों पर आधारित प्रक्रिया पर ही पदोन्नति होगी।
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मामला केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक रजिस्ट्रार पद की पदोन्नति से जुड़ा है। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2019 में कैडर भर्ती नियम- 2016 के तहत पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की थी। कोविड महामारी और कुलपति का कार्यकाल बढ़ने के कारण यह प्रक्रिया लंबित रह गई।
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इस बीच वर्ष 2022 में नए कैडर भर्ती नियम लागू कर दिए गए। विश्वविद्यालय ने इन्हीं नए नियमों के तहत 2023 और 2024 में नई अधिसूचनाएं जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू की।
याचिकाकर्ता, जो विश्वविद्यालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत हैं, ने दावा किया कि वह पुराने नियमों के अनुसार पदोन्नति के पात्र थे क्योंकि वे पांच वर्षों की आवश्यक सेवा पूरी कर चुके थे। उनका कहना था कि पहले की अधिसूचना के तहत विभागीय परीक्षा भी हो चुकी थी, ऐसे में नई अधिसूचना जारी करना उनके साथ अन्याय है।
न्यायमूर्ति संजय धर की एकल पीठ ने कहा कि कर्मचारी यह नहीं कह सकते कि जब पद रिक्त हुए थे उस समय जो नियम लागू थे केवल उन्हीं के अनुसार पद भरे जाएं। पीठ ने कहा कि सेवा मामलों में वही नियम लागू होते हैं जो नियुक्ति के समय प्रभावी होते हैं। इसलिए विश्वविद्यालय का नई अधिसूचना के जरिए पदोन्नति प्रक्रिया को नए नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने का निर्णय पूरी तरह से उचित और विधिसम्मत है।