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Jammu News: श्रीनगर के तीन समेत जम्मू-कश्मीर के 11 अस्पतालों को नोटिस जारी
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श्रीनगर। शहर के तीन अस्पतालों समेत जम्मू-कश्मीर के 11 अस्पतालों पर आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड स्वीकार नहीं करने का आरोप है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने इन 11 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अधिकारियों के अनुसार, इन अस्पतालों की लगातार शिकायत मिल रही थी। सरकार की ओर से नियुक्त पैरामाउंट हेल्थ सर्विसेज ने सर्वेक्षण किया। इसमें पता लगा कि मरीजों के गोल्डन कार्ड को ये अस्पताल नकार रहे हैं। कैशलेस उपचार देने से इन्कार करने के बाद मरीजों को अपनी जेब से पैसे देने पड़े।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) ने इन 11 अस्पतालों पर कार्रवाई की। इन सभी अस्पतालों को नोटिस भेजकर पूछा गया है कि उन्होंने आखिर क्यों उन्होंने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के गोल्डन कार्ड स्वीकार नहीं किए? उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए?-- -
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सात दिन में मांगा लिखित स्पष्टीकरण
एसएचए ने इन अस्पतालों को सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इसका पालन न करने पर जुर्माना, योजना से निलंबन या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के उल्लंघन गोल्डन कार्ड योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर करते हैं, जिसका उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सुलभ, कैशलेस स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है।
इन अस्पतालों को भेजा गया नोटिस
एसएचए ने जिन अस्पतालों को नोटिस भेजा है, उनमें एसकेआईएमएस सौरा, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल श्रीनगर, एसएमएचएस अस्पताल श्रीनगर, जेएलएनएम अस्पताल श्रीनगर, एसएमजीएस अस्पताल जम्मू, सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू, जीएमसी उधमपुर, जीएमसी राजोरी, सरकारी बाल अस्पताल बेमिना, सरकारी अस्पताल गांधी नगर और एसकेआईएमएस मेडिकल कॉलेज बेमिना शामिल हैं।
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बारे में
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। यह योजना देश के 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस इलाज सुनिश्चित करती है। इसका उद्देश्य देश के हर नागरिक को सम्मानजनक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत मरीजों को गोल्डन कार्ड जारी किया जाता है, जिसे दिखाकर वे पैनल में शामिल किसी भी अस्पताल में निशुल्क इलाज प्राप्त कर सकते हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, इन अस्पतालों की लगातार शिकायत मिल रही थी। सरकार की ओर से नियुक्त पैरामाउंट हेल्थ सर्विसेज ने सर्वेक्षण किया। इसमें पता लगा कि मरीजों के गोल्डन कार्ड को ये अस्पताल नकार रहे हैं। कैशलेस उपचार देने से इन्कार करने के बाद मरीजों को अपनी जेब से पैसे देने पड़े।
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जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) ने इन 11 अस्पतालों पर कार्रवाई की। इन सभी अस्पतालों को नोटिस भेजकर पूछा गया है कि उन्होंने आखिर क्यों उन्होंने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के गोल्डन कार्ड स्वीकार नहीं किए? उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए?
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सात दिन में मांगा लिखित स्पष्टीकरण
एसएचए ने इन अस्पतालों को सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इसका पालन न करने पर जुर्माना, योजना से निलंबन या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के उल्लंघन गोल्डन कार्ड योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर करते हैं, जिसका उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सुलभ, कैशलेस स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है।
इन अस्पतालों को भेजा गया नोटिस
एसएचए ने जिन अस्पतालों को नोटिस भेजा है, उनमें एसकेआईएमएस सौरा, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल श्रीनगर, एसएमएचएस अस्पताल श्रीनगर, जेएलएनएम अस्पताल श्रीनगर, एसएमजीएस अस्पताल जम्मू, सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू, जीएमसी उधमपुर, जीएमसी राजोरी, सरकारी बाल अस्पताल बेमिना, सरकारी अस्पताल गांधी नगर और एसकेआईएमएस मेडिकल कॉलेज बेमिना शामिल हैं।
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बारे में
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। यह योजना देश के 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस इलाज सुनिश्चित करती है। इसका उद्देश्य देश के हर नागरिक को सम्मानजनक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत मरीजों को गोल्डन कार्ड जारी किया जाता है, जिसे दिखाकर वे पैनल में शामिल किसी भी अस्पताल में निशुल्क इलाज प्राप्त कर सकते हैं।