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टाउनशिप पर केंद्र के यू-टर्न पर विस्थापितों में निराशा

Wed, 06 May 2015 09:43 PM IST
Updated Wed, 06 May 2015 09:43 PM IST
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no separate townships for kashmiri pandits: centre

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हरिभाई पी चौधरी के संसद में कश्मीरी पंडित विस्थापितों के अलग टाउनशिप पर केंद्र की ओर से विचार न किये जाने के जवाब से कश्मीरी विस्थापितों को निराशा होने के साथ साथ विपक्षी दलों ने भी इस मामले को सरकारी की नाकामी बताया है।

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वहीं, भाजपा के कश्मीरी पंडित समुदाय से एमएलसी सुरेंद्र अंबरदार का कहना हैं कि केंद्र सरकार ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। अभी तक रियासती सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्र को नहीं गया है। सबको विश्वास में लेकर ही विस्थापितों का स्थायी पुनर्वास होगा। इसमें वक्त जरूर लग सकता है।
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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा का कहना है कि इस गंभीर मामले को जैसे केंद्र की भाजपा सरकार ने उछाला और फिर इससे अपने हाथ खींचे यह केंद्र के अलावा रियासती सरकार की भी बड़ी नाकामी है।
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भ्रम की स्थिति पैदा होने से कश्मीर में भी हिंसा हुई और कश्मीरी पंडित विस्थापितों में भी भ्रम की स्थिति रही। इस मुद्दे से साफ हो गया हैं कि केंद्र सरकार की मंशा केवल इस मामले को चर्चा तक लाने में ही सीमित रही। कांग्रेस ने कश्मीरी पंडित विस्थापितों के लिए जम्मू में जगती टाउनशिप बनाने के अलावा कश्मीर में भी ट्रांजिट कैंप बनाये।

सबको विश्वास में लेकर ही होगा पुनर्वास

no separate townships for kashmiri pandits: centre

भाजपा के एमएलसी सुरेंद्र अंबरदार का कहना हैं कि केंद्र सरकार ने केवल भ्रम दूर किया है। सत्य तो यह हैं कि अभी राज्य सरकार ने न तो केंद्र सरकार को ऐसा कोई प्रस्ताव भेजा है और न ही विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने।

केंद्र सरकार सबको विश्वास में लेकर ही स्थायी पुनर्वास की तरफ आगे बढ़ना चाहती है। कोई भी टाउनशिप पूरी तरह से अलग तो बन ही नहीं सकती। वहां तो लोग रह रहे होते हैं और अलग अलग संस्कृतियों और धर्मों को मानने वाले होते ही है।

पैंथर्स पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया का कहना है कि केंद्र और रियासती सरकार हर क्षेत्र में नाकाम रह रही है। विस्थापितों के मामले में भी एकतरफा फैसले लेकर बाद में उन्हें वापिस लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।

कश्मीरी पंडित विस्थापितों के संगठन पनुन कश्मीर के प्रधान अश्विनी कुमार चुरंगू का कहना है कि पिछले एक साल से एक तरफा घोषणाओं से कश्मीरी पंडित विस्थापितों में भ्रम की स्थिति बनी है।

राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीरी पंडित विस्थापितों बारे चिंतन तो अच्छी बात है लेकिन पुनर्वास और घाटी वापसी जैसे मुद्दों को कश्मीरी पंडित विस्थापितों के प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर ही होना चाहिए।

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