कश्मीरी पंड़ितों की घर वापसी पर बढ़ रहा विवाद, पढ़ें खबर
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रियासत के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भले ही विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए घाटी में अलग टाउनशिप बनाने के लिए ‘यू टर्न’ ले लिया, लेकिन भाजपा अपने स्टैंड पर अभी भी कायम है। भाजपा विधायक रविंद्र रैणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्थापित पंडितों को घाटी में बसाने का वादा किया है और कश्मीरी पंडितों को बिना सुरक्षा वहां नहीं भेजा जाएगा।
पंडितों को कश्मीर में गोली खाने के लिए नहीं भेजा जा सकता। उन्हें पूरे सम्मान के साथ घाटी में बसाया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे पर यू टर्न लेने पर रैणा ने कहा कि इस संबंध में कोई भी फैसला केंद्र सरकार और कश्मीरी पंडितों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 25 साल के अंतराल के बाद घाटी में शांति हुई है और अब कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित की जा रही है। जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के प्रमुख एवं अलगाववादी नेता यासीन मलिक द्वारा अलग टाउनशिप का विरोध किए जाने पर विधायक ने सवालिया अंदाज में कहा कि क्या अब आतंकी कश्मीरी पंडितों का भविष्य तय करेंगे।
इसी मलिक ने वायुसेना के जवानों पर ग्रेनेड फेंका था, जिसमें चार वायुसैनिक शहीद हो गए थे। उन्होंने कहा कि हुर्रियत नेता पाकिस्तानी एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
पंडितों संग धोखा, अलग कालोनियां मंजूर नहीं
यूनाइटेड जेहाद काउंसिल के चेयरमैन सईद सलाहुद्दीन ने कश्मीरी पंडितों को घाटी में फिर से बसाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाई जा रही योजना का विरोध किया है। साथ ही सलाहुद्दीन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कश्मीरी पंडित घाटी लौटें, इस पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। पर पंडितों के लिए अलग से कालोनियां बसाने की सरकार की योजना को वो सफल नहीं होने देगा।
सरकार की ओर से एक दिन पहले ही स्पष्ट कहा गया था कि कश्मीरी पंडित कश्मीरी संस्कृति का हिस्सा हैं। उनके घर और समाज में उनकी वापसी को हर हाल में सुनिश्चित बनाया जाएगा। सरकार के फैसले के खिलाफ हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धड़ों और जेकेएलएफ की ओर से कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से कालोनियां बनाने के फैसले के खिलाफ हड़ताल का फैसला किया गया था।
कश्मीरी पंडितों को अलग से कालोनियां बनाकर बसाने को सलाहुद्दीन ने एक साजिश बताया। उसने कहा कि सरकार कश्मीर के मुस्लिम बहुल चरित्र को बदलना चाहती है और हम इसे हरगिज नहीं होने देंगे।
'अलगाववादियों को बोलने का कोई हक नहीं'
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) ने वीरवार को एक बयान जारी कर अलगाववादियों द्वारा शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन और शनिवार को कश्मीर बंद के आह्वान पर रोष जताया है। केपीएसएस के अनुसार कश्मीरी अलगाववादी एक सुर में कश्मीरी विस्थापितों को घाटी में लाने का विरोध करते नजर आ रहे हैं।
उनका कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लेकर बनाई जाने वाली नीतियों में बोलने का कोई हक नहीं बनता, क्योंकि यह वही लोग थे, जिन्होंने इस समुदाय के खिलाफ अपराध किए थे। केपीएसएस ने यह भी कहा कि कश्मीरी पंडितों का भाग्य घाटी में 1990 से पैदा हुई राजनीतिक खलबली के चलते भंवर में ही फंसा रहा।
केपीएसएस के अनुसार आज जो लोग उनकी वापसी की बात कर रहे हैं, यह वही लोग थे, जिन्होंने कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों की हत्या के आदेश जारी किए थे। आज यही लोग अपनी शर्तें रख कश्मीरी विस्थापितों को उनकी भूमि से दूर रखने की योजना के तहत साबित करना चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग खुद कश्मीर वापस लौटना नहीं चाहते।
वर्ष 2008 में इन्हीं अलगाववादियों ने अल्पसंख्यकों के धार्मिक संस्थानों के लिए जमीन देने की बात पर कश्मीर में हालात बिगाड़े थे।
एक जून से 30 अक्टूबर तकं हुई थीं ज्यादातर हत्याएं
केपीएसएस को यह लग रहा है कि जानबूझ कर ऐसे हालात पैदा किए जा रहे हैं, जिससे कश्मीरी विस्थापितों की घर वापसी और पुनर्वास जैसी योजनाओं को सरकारी शेल्फों पर धूल खाने के लिए रखा जा सके। केपीएसएस ने अपने बयान में अलगाववादियों से यह सवाल भी पूछा कि एक जून 1990 से 30 अक्टूबर 1990 तक ज्यादातर हत्याएं क्यों र्हुइं।
अभी तक उनके किसी खेमे में से इन हत्याओं को लेकर जांच की मांग क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह बात भी स्पष्ट की कि वह बहुसंख्यक समुदाय के अपने पड़ोसियों और दोस्तों की बदौलत यहां रह रहे हैं न की किसी राजनीतिक दल और अलगाववादियों के भरोसे।
केपीएसएस के अनुसार राज्य तथा केंद्र सरकार क्यों नहीं उन कश्मीरी पंडितों में से एक कमेटी का गठन करे, जो घाटी में रह रहे थे और जो यहां की हर एक स्थिति से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि यह लोग सही तरह से कश्मीरी विस्थापितों की पुनर्वास की सही योजना का गठन कर सकते हैं।
कश्मीर दौरे पर आए मशहूर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने भी श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन में घूमने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप बनाना अच्छी पहल है। यहां रहने के लिए उन्हें आना चाहिए। खेर ने यह भी कहा कि अपने घरों में लौटना उनके लिए सुरक्षित नहीं।
योजनाएं बनी पर नहीं लौटे कश्मीर पंडित
कश्मीरी पंडित विस्थापितों के लिए घाटी में अलग टाउनशिप पर उठा विवाद चाहे नया हो लेकिन इससे पूर्व भी कई योजनाएं बनी और फाइलों में दबी रह गई। लेकिन कश्मीरी पंडित विस्थापित घाटी में अपने घरों को नहीं लौट पाएं। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के चलते कश्मीरी पंडित विस्थापितों के अलावा सिख और मुस्लिम समुदाय के भी कई परिवारों का साल 1990 में जम्मू व देश के विभिन्न हिस्सों में पलायन हो गया था।
आज तक यह परिवार विस्थापन का दंश झेल रहे है। इनमें 41117 परिवार जम्मू में पंजीकृत हैं जबकि 21333 विस्थापितों के परिवार देश के विभिन्न 12 राज्यों में रह रहे है। विस्थापितों के परिवारों में 37128 हिंदू, 2246 मुस्लिम और 1738 सिख परिवार शामिल है।
केंद्र और रियासती सरकार की ओर से कश्मीरी विस्थापितों के लिए घाटी वापसी और पुनर्वास के लिए 1618.40 करोड़ की राशि मंजूर करने के बावजूद विस्थापितों का समर्थन इस योजना को भी नहीं मिला था। बस रोजगार और घाटी में ट्रांजिट कैंपों के निर्माण तक ही यह योजना सिमट कर रह गई थी।
कहां कहां रह रहे विस्थापित
जम्मू-41117
दिल्ली-19338
हिमाचल प्रदेश-11
चंडीगढ़-114
पंजाब-319
उत्तर प्रदेश-222
उत्तरांचल-57
मध्य प्रदेश-43
तामिलनाडु-01
कर्नाटक-38
महाराष्ट्र-208
राजस्थान-58
विरोध करने वालों ने ही निकाला था घर से
विस्थापित कश्मीरी पंडितों की घर वापिसी को लेकर कश्मीर में किए जा रहे विरोध के बाद जगती में रह रहे कश्मीरी पंडितों में अलगाववादियों के प्रति काफी रोष है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि जो लोग उनके घर वापिसी का विरोध कर रहे हैं यह वही लोग हैं जिन्होंने उनको घर से बाहर निकाला था।
आज पूरे विश्व के सामने इनकी सच्चाई सामने आ चुकी है। अगर सरकार सुरक्षा के साथ उनको सैटेलाइट टाउन बनाकर देती है तो सभी घर जाने को तैयार हैं। शादी लाल पंडिता, राजेंद्र धर, सुनील रैना, विजय पंडिता व अन्य कई कश्मीरी पंडितों का कहना है कि उनके घर वापिसी का विरोध करने वालों ने ही कभी उनको आतंकवाद की आग में जलाकर कश्मीर को छोड़ने को मजबूर किया था।
इन्हीं लोगों ने कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया और हजारों कश्मीरियों को बेघर किया था। आज इनकी सच्चाई सबके सामने अपने लगी है। यह बात भी साबित होती है जो लोग उनका विरोध कर रहे हैं यह सभी देशद्रोही हैं। केंद्र सरकार की तरफ से उनकी घर वापिसी की योजना तैयार की गई है, लेकिन अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि इस पर पूरी इमानदारी के साथ काम करे। सभी घर लौटने को तैयार हैं, लेकिन उनको सैटेलाइट टाउन में कड़ी सुरक्षा की भी सख्त जरूरत है।