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अमरनाथ यात्रा के चलते नहीं है किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रतिबंध: बसीर खान
Wed, 10 Jul 2019 09:51 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 10 Jul 2019 09:51 PM IST
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डिवीजनल कमिश्नर बसीर खान और आईजी कश्मीर एसपी पाणी
- फोटो : बासित जरगर
कश्मीर संभाग के डिवीजनल कमिश्नर बसीर खान ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया और अखबारों के जरिये पढ़ा कि समाज के कई वर्गों की तरफ से यह कहते हुए चिंता व्यक्त की गई कि हाईवे पर प्रतिबंध है। वह यह बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि हाईवे पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। ऐसा कुछ नहीं है सिर्फ रेगुलेशन इस्तेमाल की जा रही है। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई कारणों के चलते इसको रेगुलेट ट्रैफिक एडवाइजरी के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है। उनमें से एक कारण कानवाई का लंबा होना और हाईवे की हालत को ध्यान में रखा जाना।
वह यहां बुधवार को पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कल भी कुछ जगहों पर शूटिंग स्टोन के चलते 5 लोग घायल हुए। इस एडवाइजरी के चलते हमने स्लॉट इश्यू किए हैं। उनमें यात्रा की गाड़ियों को निकाला जाता है ताकि बाकी लोगों को दिक्कत न हो। ऐसा नहीं है कि ब्लैंकेट बैन है जबकि कुछ समय का प्रतिबंध रहता है। जब तक वहां से कानवाई गुजरती है वहां रुकावट रहती है, लेकिन बाद में सब सामान्य हो जाता है।
खान ने कहा कि सुबह से दोपहर तक आम लोग, पर्यटक आदि को चलने की अनुमति है। यह सिर्फ इसलिए है कि किसी प्रकार से यातायात बाधित न हो। अगर किसी को श्रीनगर से काजीगुंड जाना है तो उसके लिए मजिस्ट्रेट व पुलिस के अधिकारी पनथा चौक में बैठे हैं जो मौके पर ही केस देखकर अनुमति देते हैं।
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खान के अनुसार शुरू में उनके पास रिपोर्ट आई थी कि कुछ जगहों पर बिना किसी वजह के लोगों को रोका गया। इसके बाद उन्होंने पर्यटन क्षेत्र से जुडे़ हितधारकों से बैठकें की, जिसमें रूट पहचान कर समय तय कर एक कार्यक्रम तैयार किया गया। प्रतिबंध के समय भी मामले की पहचान कर उन्हें जाने की अनुमति दी जाती है। यह सब जानते हैं कि यात्रा के शुरुआती दिनों में गाड़ियों का लोड ज्यादा रहता है। इसलिए इस एडवाइजरी को जारी किया गया। अगर ऐसा न किया जाए तो जाम खुलवाने में जहां एक घंटा लगता है वहां छह-छह घंटे लग जाएं।
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वह यहां बुधवार को पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कल भी कुछ जगहों पर शूटिंग स्टोन के चलते 5 लोग घायल हुए। इस एडवाइजरी के चलते हमने स्लॉट इश्यू किए हैं। उनमें यात्रा की गाड़ियों को निकाला जाता है ताकि बाकी लोगों को दिक्कत न हो। ऐसा नहीं है कि ब्लैंकेट बैन है जबकि कुछ समय का प्रतिबंध रहता है। जब तक वहां से कानवाई गुजरती है वहां रुकावट रहती है, लेकिन बाद में सब सामान्य हो जाता है।
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खान ने कहा कि सुबह से दोपहर तक आम लोग, पर्यटक आदि को चलने की अनुमति है। यह सिर्फ इसलिए है कि किसी प्रकार से यातायात बाधित न हो। अगर किसी को श्रीनगर से काजीगुंड जाना है तो उसके लिए मजिस्ट्रेट व पुलिस के अधिकारी पनथा चौक में बैठे हैं जो मौके पर ही केस देखकर अनुमति देते हैं।
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खान के अनुसार शुरू में उनके पास रिपोर्ट आई थी कि कुछ जगहों पर बिना किसी वजह के लोगों को रोका गया। इसके बाद उन्होंने पर्यटन क्षेत्र से जुडे़ हितधारकों से बैठकें की, जिसमें रूट पहचान कर समय तय कर एक कार्यक्रम तैयार किया गया। प्रतिबंध के समय भी मामले की पहचान कर उन्हें जाने की अनुमति दी जाती है। यह सब जानते हैं कि यात्रा के शुरुआती दिनों में गाड़ियों का लोड ज्यादा रहता है। इसलिए इस एडवाइजरी को जारी किया गया। अगर ऐसा न किया जाए तो जाम खुलवाने में जहां एक घंटा लगता है वहां छह-छह घंटे लग जाएं।
कानूनी मदद ली जाएगी
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के भांजे मुजफ्फर शाह के अनुसार उन्हें यह प्रतिबंध मंजूर नहीं। उनके अनुसार पहलगाम के बटकूट के रहने वाले एक मुसलमान को भगवान शिव ने चुना और अपनी गार (गुफा) दिखाई, जिसके बारे में उसने हिंदू धर्म के लोगों को इसकी जानकारी दी। आज उसी को प्रताड़ित किया जा रहा है जो इस धार्मिक यात्रा के पीछे शामिल था। उनका कहना है कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला और अन्य सांसद इस मसले को संसद में उठाएं। शाह ने कहा कि हम यह बताना भी चाहते हैं कि यह पहले हमारी जिम्मेदारी है यात्रियों की सुरक्षा करना और बाद में सुरक्षा एजेंसियों की। यह सिलसिला सदियों से चला आया है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस पर अगर कुछ ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो कानूनी मदद ली जाएगी।