सरकार गठन की चर्चाओं पर महबूबा ने तोड़ी चुप्पी
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मुख्यमंत्री बनना बड़ी बात नहीं है। मुफ्ती साहब के निधन के अगले दिन भी मुख्यमंत्री बन सकती थी, लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं लगा। क्योंकि मुझे लोगों की चिंता है।
पीडीपी से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। पीडीपी सरकार में रहते हुए और पहले भी लोगों के साथ थी। यही वजह है कि वह मजबूत स्थिति में आई।
महबूबा बोलीं, जिद छोड़ बातचीत को आगे बढ़ें भारत-पाक
डाकबंगला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान अपनी जिद छोड़ कर बातचीत के लिए आगे बढ़ें।
हाल में घाटी में जो घटनाएं हुईं, वह दुर्भाग्यपूर्ण हैं। घाटी में इस वक्त जो युवक हथियार उठा रहे है, यह चिंता का विषय है। मुफ्ती मोहम्मद सईद ने गठबंधन की दस महीने की सरकार में जो कार्य किए, वह यादगार हैं।
प्रधानमंत्री का पाकिस्तान जाना अच्छा कदम था। इसका श्रेय मुफ्ती साहब को जाता है, जिन्होंने बार-बार पाकिस्तान से संबंध बेहतर बनाने के लिए दबाव बनाया।
जब महबूबा की आंखों से टपके आंसू
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने बेटी की तरह समझा, लेकिन उनके कार्यकाल में भारत-पाकिस्तान से बातचीत बढ़ाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
महबूबा ने पार्टी की सदस्यता अभियान का भी यहां शुभारंभ किया। महबूबा मुफ्ती की आंखों से उस वक्त आंसू टपक पड़े, जब उन्होंने मुफ्ती मोहम्मद सईद के कार्यकाल की बातें कीं।
अपने पिता के देहांत के बाद महबूबा पहली दफा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं से मिलीं। जनसभा के दौरान ऐसा लगा कि सरकार गठन में अभी और देर हो सकती है।