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ये कैसा सुपर स्पेशलिटी, न ब्लड बैंक, न दवाइयां

Sun, 17 May 2015 12:19 PM IST
Updated Sun, 17 May 2015 12:19 PM IST
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no blood bank and no medicine in jammu super speciality

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद भले ही जम्मू में एम्स की मांग को दरकिनार करते हुए एम्स की तर्ज पर रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को अपग्रेड करने के दावे कर रहे हैं, मगर सुपर स्पेशलिटी में अभी बुनियादी सुविधाएं ही गायब हैं।

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न कैंटीन, न दवाइयों की दुकानें, न एक्सचेंज। यही नहीं अस्पताल में कई यूनिटों में सर्जरी तो की जा रही है, मगर अस्पताल के पास अभी तक अपना ब्लड बैंक ही नहीं है। खून के लिए तीमारदारों को दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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सुपर स्पेशलिटी में नेफरोलाजी, यूरोलाजी, सीटीवीएस, कार्डियोलाजी, न्यूरोसर्जरी, गेस्ट्रोलाजी यूनिट में ओपीडी के अलावा मरीजों को इंडोर वार्ड में इलाज दिया जा रहा है। इसमें यूरोलाजी, न्यूरो, कार्डियो में रोजाना सर्जरी की जा रही हैं, लेकिन सर्जरी के लिए अस्पताल में स्टोरेज सेंटर से ही काम चलाया जा रहा है।
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रात में मरीजों को होती है भारी परेशानी

no blood bank and no medicine in jammu super speciality

अस्पताल में कैंटीन सुविधा भी न होने से खासकर रात्रि के समय ठहरने वाले मरीजों और तीमारदारों को जरूरी सामान के लिए महेशपुरा चौक या जीएमसी की कैंटीन में जाना पड़ता है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विभिन्न वार्डों में मरीजों को भर्ती करने के साथ ओपीडी चल रही है।

लेकिन अस्पताल में कोई भी दवाई की दुकान न होने से मरीजों को जीएमसी के बाहर केमिस्ट दुकानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अस्पताल के भीतर इंटरकाम टेलीफोन की सुविधा तो हाल ही में शुरू की गई है, मगर एक्सचेंज न होने से बाहर से कोई भी अपने मरीज से फोन पर संपर्क नहीं साध सकता है।

वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया था। इस प्रोजेक्ट को सीपीडब्ल्यूडी (सेंटर पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट) विभाग ने 17 फरवरी 2008 को शुरू किया था। 18 माह में मुक्कमल होने वाले इस प्रोजेक्ट को 2013 में करीब 64 महीनों बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सका।

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