नितिन गडकरी ने इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर दिया जोर
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जम्मू को नई दिल्ली और नई मुंबई की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए। इसके अलावा रियासत में काफी हाइड्रो प्रोजेक्ट है, जिनका प्रयोग इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए किया जाना चाहिए। इसके लिए सड़क और परिवहन मंत्रालय पूरा सहयोग करेगा। यह बात केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कीड़ियां-गडियाल में परियोजना के लोकार्पण अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसें चलाने से जम्मू-कश्मीर क्लीन और ग्रीन बना रहेगा। जरूरत पड़ने पर हवा में चलने वाली डब्बल डेकर बसें भी चलाई जा सकती हैं। इससे रियासत में रोजगार बढ़ेगा और टिकट का रेट भी कम होगा। गडकरी ने कहा कि पांच साल में 50 साल से ज्यादा काम हुआ है। 2014 में नेशनल हाईवे की लंबाई 1695 किलोमीटर थी और 7 राष्ट्रीय महामार्ग थे।
जबकि 2018 में 2664 किलोमीटर नेशनल हाईवे का विस्तार किया गया है और महामार्ग की संख्या दोगुनी हो गई है। लेह के बीच 170 के बीच लबे मार्ग को नेशनल हाईवे, जम्मू-नौशहरा-पुंछ के 246 किलोमीटर, श्रीनगर-शोपियां-काजीकुंड 100 किलोमीटर और कटरा-पौनी के 53 किलोमीटर लंबे हाइवे को मंजूर किया है।
डिंगा अंब-छलां-उधमपुर, लखनपुर-महानपुर-बसोहली, बसोहली-भद्रवाह-डोडा व ठाठरी नेशनल हाइवे को सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री ने रियासत के लिए विशेष पैकेज के तहत 45107 करोड़ रुपये दिए थे, जिनसे 16 परियोजनाओं का काम जारी है। करीब 30 हजार करोड़ के काम शुरू हो चुके हैं।
कई मार्गों की डीपीआर तैयार
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने बताया कि लचुंगला सड़क और कारगिल जांस्कार सड़क डीपीआर बन गई है। श्रीनगर-शोपियां सड़क का डीपीआर भी तैयार है। जम्मू-श्रीनगर और लेह-श्रीनगर दो बड़े कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं। इन सड़कों के बनने से रियासत को काफी लाभ होगा।
जोजिला टनल से खुलेगा विकास का द्वार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एशिया की सबसे लंबी जोजिला टनल (14.2 किलोमीटर) के बनने से लद्दाख और लेह को लाभ होगा। इससे क्षेत्र के विकास का द्वार खुलेगा। निर्माण कंपनी बंद हो गई है, लेकिन इसके लिए मार्ग तलाशा जा रहा है। जोजिला टनल का काम कठिन है।